जमशेदपुर/रांची : चांडिल-टाटानगर रेल सेक्शन में ट्रेनों के लगातार घंटों की देरी से परिचालन को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कड़ा रुख अपनाया है। सीएम ने इस अव्यवस्था के लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जनता की परेशानी को मुद्दा बनाया है।
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राजस्व झारखंड से, पर सुविधाएं शून्य: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड से रेलवे को सबसे अधिक राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन बदले में यहाँ की जनता को केवल लेटलतीफी और बदइंतजामी मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे का ध्यान सिर्फ संसाधनों के दोहन पर है, जबकि आम यात्रियों, छात्रों और मरीजों की सुविधाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
खबर के मुख्य बिंदु:
यात्रियों की फजीहत: चांडिल-टाटानगर मार्ग पर पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के घंटों लेट होने से दैनिक यात्रियों का कामकाज ठप हो रहा है।
मालगाड़ियों को तरजीह: सीएम ने निशाना साधते हुए कहा कि मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए यात्री ट्रेनों को आउटर पर खड़ा कर दिया जाता है, जो आम जनता के साथ अन्याय है।
केंद्र से जवाब की मांग: मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से पूछा है कि आखिर झारखंड के रेल यात्रियों के साथ यह ‘सौतेला व्यवहार’ कब तक चलेगा?
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
टाटानगर और चांडिल के बीच सफर करने वाले हजारों दैनिक यात्रियों के लिए यह समस्या जी का जंजाल बन गई है। सीएम के इस बयान के बाद अब रेलवे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। यात्रियों का कहना है कि विकास के नाम पर तीसरी लाइन का काम तो चल रहा है, लेकिन इसका खामियाजा जनता को अपनी आजीविका गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।