बिरसानगर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों पर उठे सवाल, बुनियादी सुविधाएं भी अधूरी
जमशेदपुर : बिरसानगर स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित आवासों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सौरभ विष्णु ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभागीय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे लाभुकों की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा बताया है।



सौरभ विष्णु ने आरोप लगाया कि अब तक कई अनिवार्य जांच और प्रमाणपत्र पूरे नहीं किए गए हैं। उनके अनुसार, बिल्डिंग क्वालिटी इंस्पेक्शन सर्टिफिकेट और Certificate of Occupancy (CO) जैसी आवश्यक प्रक्रियाएं लंबित हैं, जो सीधे तौर पर निर्माण की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। उन्होंने इसे विभागीय लापरवाही का उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि केवल भवन का निर्माण कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें रहने योग्य बुनियादी सुविधाओं का होना भी उतना ही आवश्यक है। वर्तमान स्थिति में ड्रेनेज सिस्टम (नाली व्यवस्था) और पानी की उपलब्धता जैसी मूलभूत सुविधाएं अधूरी नजर आ रही हैं, जिससे भविष्य में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
सौरभ विष्णु ने स्पष्ट कहा कि जब तक सभी तकनीकी मानकों की जांच पूरी नहीं हो जाती और आवश्यक प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जाते, तब तक इन आवासों को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक लाभुक को यह जानने का अधिकार है कि उसे जो घर दिया जा रहा है, वह पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप है या नहीं।
उन्होंने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि इतना समय बीत जाने के बावजूद यदि जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो पाई हैं, तो यह प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। अंत में उन्होंने प्रशासन से अपील की कि गृह प्रवेश से पहले सभी आवश्यक प्रमाणपत्र, सुरक्षा मानक और बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि लाभुकों का विश्वास बना रहे और योजना का उद्देश्य सही मायनों में पूरा हो सके।
