मुरी (राँची/झारखंड) : त्याग, समर्पण और आपसी भाईचारे का महापर्व बकरीद (ईद-उल-अजहा) मुरी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बेहद शांतिपूर्ण, अकीदत और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया गया। इस पावन अवसर पर सुबह से ही मुस्लिम समाज के लोगों में भारी उत्साह देखा गया।



मस्जिदों में उमड़ा जनसैलाब, मांगी गई अमन-चैन की दुआ
बकरीद के मुख्य अवसर पर ऐतिहासिक मुरी जामा मस्जिद में मुस्लिम समाज के हजारों अकीदतमंदों ने सुबह की विशेष नमाज अदा की। नमाज के बाद बारगाहे-इलाही में समाज की खुशहाली, आपसी भाईचारे और देश (मुल्क) की तरक्की व सलामती के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। जामा मस्जिद के अलावा क्षेत्र के कलुवाडीह, सुलूमजुडी, मुरी रेलवे मस्जिद और कुटाम स्थित मस्जिदों और ईदगाहों में भी शांतिपूर्ण ढंग से नमाज पढ़े जाने की सूचना है। हर जगह अकीदतमंदों ने पूरी शिद्दत के साथ नमाज मुकम्मल की।
गले मिलकर दी बधाई, बाजारों में रही रौनक
नमाज संपन्न होने के बाद मस्जिदों के बाहर बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिला, जहाँ लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद दी। त्योहार को लेकर मुरी के स्थानीय बाजारों में भी खासी चहल-पहल रही। मुस्लिम समाज के लोगों के लिए खाद्य सामग्री, सेवइयां और अन्य जरूरी सामानों के स्टॉल और दुकानें सजी हुई थीं, जहाँ लोगों ने जमकर खरीदारी की।
प्रबुद्ध जनों ने दी शुभकामनाएं
इस शुभ अवसर पर कलुवाडीह के प्रतिष्ठित समाज सेवी फारुख मोमिन ने समस्त क्षेत्रवासियों को बकरीद की पुरखुलूस मुबारकबाद पेश की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह त्योहार हमें त्याग और समाज में मिलजुल कर रहने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी के उत्तम स्वास्थ्य और सलामती की दुआ की।
प्रशासन की सतर्कता और स्थानीय लोगों के सहयोग के कारण पूरा त्योहार शांति और कौमी एकता की मिसाल के साथ संपन्न हुआ।
रिपोर्ट : रिंकी कुमारी



