जमशेदपुर : एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में लगातार सामने आ रही कथित लापरवाही और मरीजों की मौत की घटनाओं को लेकर जन विकास मंच के प्रमुख सौरभ विष्णु ने स्वास्थ्य व्यवस्था तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में हो रही घटनाएं केवल व्यक्तिगत स्तर की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता को दर्शाती हैं।



सोमवार को जारी बयान में सौरभ विष्णु ने कहा कि हाल के दिनों में अस्पताल में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने आम लोगों का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था से कमजोर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रवण कुमार की मौत समय पर समुचित इलाज और रेफर नहीं किए जाने के कारण हुई। वहीं एक अन्य मामले में डायबिटीज से पीड़ित 13 वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। आरोप है कि मृत्यु के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा शव को ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण पिता को अपने पुत्र के शव को गोद में उठाकर अस्पताल परिसर से बाहर निकलना पड़ा।
उन्होंने कहा कि एक अन्य मामले में नवजात शिशु के जन्म के समय ही मृत्यु हो जाने के बावजूद परिजनों को तत्काल जानकारी नहीं दी गई। परिजनों को करीब पांच घंटे बाद इसकी सूचना दिए जाने का आरोप है, जो अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली और संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सौरभ विष्णु ने बताया कि अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर उन्होंने 19 मई 2026 को उपायुक्त राजीव रंजन से एमजीएम अस्पताल का औचक निरीक्षण कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद एडीसी द्वारा निरीक्षण भी किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है और पिछले दो सप्ताह के भीतर कई मौतों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इन घटनाओं की जिम्मेदारी कौन तय करेगा। साथ ही उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नई जांच समिति का गठन किया जाए, ताकि मृतकों के परिजनों को न्याय मिल सके और वास्तविक तथ्यों का खुलासा हो सके।
सौरभ विष्णु ने कहा कि यदि इसी प्रकार की घटनाएं किसी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम में हुई होतीं, तो अब तक जांच समिति गठित कर दी जाती, संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होती और कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल में घटनाएं होने के बावजूद प्रशासन अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
उन्होंने मांग की कि एमजीएम अस्पताल में सामने आए सभी मामलों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और लोगों का स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास कायम रह सके।



