चाणक्य शाह की कलम से…
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“कहते है ना मां के आंचल के छांव जैसा दुनिया में कुछ नहीं ये.. वो मां है जो चिड़िया के चहचहाने से पहले उठ जाती है… ये वो मां है जो सूरज उगने से पहले जग जाती है ये वहीं मां है जो नौ महीने कठिन तप के बाद बेटे को जन्म देती है. एक मां का बेटा अगर 17 दिनों से चट्टानों से हल पल जंग लड़ रहा हो और मां को मालूम चल जाए तो जरा आप सोचिए उस मां पर हर पल क्या बीत रहा होगा. और उस मां का हाल चाल लेने के लिए उस मां का दर्द पूछने के लिए अगर कोई नेता… विधायक…सांसद या समाजसेवा के नाम पर ढिंढोरा पीटने वाला कोई खड़ा ना हो तो इससे बड़ा शर्म का बात कुछ हो सकता है क्या … ?? जरा सोचिएगा और जरूर बताआइए!!!!”
सहारा बनकर जब पहुंच गए समाजसेवी रवि जयसवाल….
वाकई वो लम्हा और वो पल दिल को झकझोर देने वाला है जहां कोई नहीं नही पहुंचा मदद के लिए वहां समाजसेवी रवि जयसवाल उस मां का सहारा बनकर पहुंचे और उनका हाल जाना और जितना बन पाया मदद किया. एक मां रवि जयसवाल के मदद को पाकर खुश तो हुई लेकिन फफक फफक रो पड़ी और अपना दर्द बयां करने लगी।
12 नवंबर 2023 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 134 को जोड़ने के लिए बनाई गई सिल्कयारा बेंड-बारकोट सुरंग का एक हिस्सा निर्माणाधीन होने के दौरान ढह गया जिसमे 41 श्रमिक सुरंग के अंदर फंस गए थे, जिसमे 6 मजदूर झारखण्ड के डुमरिया के रहने वाले थे, मजदूरों को 17 दिन के बाद अथक प्रयास से सकुशल टनल से बाहर निकाल लिया गया और मेडिकल ऑब्जरवेशन के लिए रख दिया गया. वही झारखण्ड डुमरिया के मजदूरों मे से 2 परिवार बहुत ही गरीबी की जिंदगी जी थे. इसकी सुचना समाचार के माध्यम से मिली पता चला कि घर मे खाने तक को राशन नहीं है. इसी बीच भूक्तु मुर्मू के पिता का भी देहांत हो गया. इसको लेकर डुमरिया थाना प्रभारी से सम्पर्क किया गया और दोनों परिवार की स्थिति को देखकर दोनों परिवार के लिए मदद किया गया. इसके साथ ही भूक्तु मुर्मू के परिवार के 2 बच्चो को मैट्रिक की पढ़ाई का जिम्मा भी उठाया गया।
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