बरेली : उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को अपने आठ प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया। इनमें बरेली की श्रुति गंगवार का नाम भी शामिल है। श्रुति गंगवार झारखंड के राज्यपाल और बरेली के पूर्व सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष कुमार गंगवार की बेटी हैं। राज्यसभा चुनाव 16 अक्टूबर को होना है. श्रुति गंगवार के नाम की घोषणा के साथ ही बरेली और रूहेलखंड की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। करीब चार दशक तक बरेली की राजनीति में सक्रिय रहे संतोष गंगवार की राजनीतिक विरासत से जुड़े परिवार की नई पीढ़ी की औपचारिक राजनीतिक पारी के रूप में इसे देखा जा रहा है। हालांकि भाजपा की ओर से उम्मीदवार चयन के पीछे किसी विशेष जातीय या राजनीतिक उद्देश्य की आधिकारिक व्याख्या नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषण में इसे क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में देखा जा रहा है।

बरेली की राजनीति में गंगवार परिवार की लंबी मौजूदगी…..
संतोष गंगवार बरेली से लंबे समय तक सांसद रहे और केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। 2019 में वे आठवीं बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। 2024 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। झारखंड राजभवन की आधिकारिक प्रोफाइल में भी श्रुति गंगवार को संतोष गंगवार की बेटी के रूप में दर्ज किया गया है. अब भाजपा ने श्रुति गंगवार को राज्यसभा प्रत्याशी बनाकर गंगवार परिवार की राजनीतिक भूमिका को एक नए स्तर पर आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। इससे बरेली की स्थानीय राजनीति में भी उनके नाम को लेकर नई सक्रियता देखने को मिल सकती है।
अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष हैं श्रुति……
श्रुति गंगवार बरेली अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की अध्यक्ष हैं। बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में उन्हें अध्यक्ष के रूप में दर्ज किया गया है. राजनीति में आने से पहले सामाजिक और संस्थागत गतिविधियों से जुड़ी रहीं श्रुति के लिए राज्यसभा की उम्मीदवारी राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। भाजपा की घोषित सूची में श्रुति गंगवार के अलावा प्रियंका सिंह रावत को भी महिला प्रत्याशी बनाया गया है।
रूहेलखंड के सामाजिक समीकरण पर भी नजर……
बरेली के साथ बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर समेत रूहेलखंड के कई इलाकों में विभिन्न पिछड़े वर्गों की महत्वपूर्ण राजनीतिक मौजूदगी रही है। ऐसे में श्रुति गंगवार की उम्मीदवारी को क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरणों के नजरिये से भी देखा जा रहा है. भाजपा ने उत्तर प्रदेश के लिए घोषित आठ उम्मीदवारों की सूची में तीन ओबीसी, दो अनुसूचित जाति और तीन सामान्य वर्ग के चेहरों को जगह दी है। पार्टी की सूची में श्रुति गंगवार के साथ धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत और राम प्रताप सिंह चौहान शामिल हैं।
नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का संकेत……
राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो श्रुति गंगवार की उम्मीदवारी भाजपा में पुराने राजनीतिक परिवारों की विरासत और नई पीढ़ी के नेतृत्व के बीच एक कड़ी के रूप में सामने आई है। संतोष गंगवार को 2024 में झारखंड के राज्यपाल की जिम्मेदारी मिलने के बाद अब उनकी बेटी को राज्यसभा का टिकट मिलना गंगवार परिवार की राजनीतिक भूमिका को नए रूप में सामने लाता है।
आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और नए चेहरों को लेकर भाजपा की रणनीति पर भी चर्चा तेज हो गई है। श्रुति गंगवार के नाम ने खास तौर पर बरेली और रूहेलखंड की राजनीति में इस बहस को और व्यापक कर दिया है. अब निगाहें 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव और उसके बाद बरेली की स्थानीय राजनीति में श्रुति गंगवार की भूमिका पर टिकी रहेंगी।
