जमशेदपुर : गोलमुरी चौक की लगातार जानलेवा होती सड़क व्यवस्था के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हादसों पर रोक और लोगों की जिंदगी बचाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे बजरंग सेवा संस्थान के जिलाध्यक्ष धर्मवीर महतो के आंदोलन ने तीसरे दिन प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया। सड़क सुरक्षा को लेकर उठी आवाज अब जमीन पर असर दिखाने लगी है. धर्मवीर महतो की लगातार गिरती सेहत के बावजूद आंदोलन जारी रहा। इसी बीच कांग्रेस प्रदेश महासचिव शशि भूषण राय और जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू अनशन स्थल पर पहुंचीं और आंदोलन को समर्थन दिया। विधायक की पहल के बाद प्रशासन से बातचीत हुई और आनन-फानन में गोलमुरी चौक पर अस्थायी डिवाइडर खड़ा कर दिया गया।

सिर्फ रस्सी-बैरिकेडिंग नहीं, अब स्थायी समाधान की मांग…..
आंदोलनकारियों का कहना है कि अस्थायी इंतजाम महज तत्काल राहत है। असली जरूरत सड़क के बीच स्थायी डिवाइडर, स्पीड ब्रेकर और गोलचक्कर निर्माण की है। आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच जुस्को (टाटा स्टील यूआईएसएल) के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और सोमवार से स्थायी काम शुरू कराने का भरोसा दिया. हालांकि धर्मवीर महतो ने साफ कर दिया है कि आंदोलन केवल आश्वासन पर खत्म नहीं होगा। उनका कहना है कि जब तक मौके पर वास्तविक रूप से काम शुरू नहीं होता, तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी। यानी अब गेंद प्रशासन के पाले में है—वादे को जमीन पर उतारना होगा।
18 दिन में 10 हादसे, दो युवाओं की मौत ने बढ़ाई चिंता……
गोलमुरी का मुख्य मार्ग पिछले दो महीनों से हादसों के लिए बदनाम हो चुका है। महज 18 दिनों के आंकड़े ही सड़क की भयावह तस्वीर सामने रखने के लिए काफी हैं। पानी टंकी और आकाशदीप प्लाजा के पास 10 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें दो युवाओं की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे. आंदोलनकारियों का आरोप है कि सड़क के बीच डिवाइडर का अभाव, बेतरतीब पार्किंग और सड़क किनारे लगे होर्डिंग पोल वाहनों की तेज रफ्तार के साथ मिलकर हादसों को न्योता दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि गोलमुरी चौक अब महज यातायात का केंद्र नहीं, बल्कि जनसुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
जनता की आवाज ने दिखाया असर……
लगातार हादसों के खिलाफ उठी आवाज, भूख हड़ताल और जनदबाव के बाद अस्थायी डिवाइडर का लगना आंदोलन की पहली बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। लेकिन आंदोलनकारियों की नजर अब सोमवार से शुरू होने वाले स्थायी निर्माण कार्य पर टिकी है।
साफ संदेश है—रस्सी से रास्ता कुछ समय के लिए संभल सकता है, लेकिन जिंदगी बचाने के लिए पक्का डिवाइडर ही चाहिए। गोलमुरी की सड़क को ‘खूनी सड़क’ से सुरक्षित सड़क बनाने की लड़ाई अभी जारी है।
