जमशेदपुर : सिंहभूम सेंट्रल दुर्गा पूजा कमिटी में गैर-हिंदू पदाधिकारी की मौजूदगी और गरबा-डांडिया कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं की भागीदारी को लेकर जारी विवाद के बीच आजसू पार्टी के प्रवक्ता अप्पू तिवारी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने धार्मिक आयोजनों और संस्थाओं के संदर्भ में कथित दोहरे मापदंड अपनाने वालों पर निशाना साधते हुए समाज से आत्ममंथन करने की अपील की है. अप्पू तिवारी ने सवाल किया कि यदि सिंहभूम सेंट्रल दुर्गा पूजा कमिटी में गैर-हिंदू व्यक्ति को पदाधिकारी की जिम्मेदारी दी जा सकती है, तो गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में गैर-हिंदुओं की भागीदारी को लेकर विरोध क्यों किया जाता है? उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों की मर्यादा और पवित्रता को लेकर चिंता है, तो उसके मानदंड सभी जगह समान होने चाहिए।

### विवाद खड़ा करना उद्देश्य या समाज निर्माण?….
अप्पू तिवारी ने कहा, “हिंदू समाज आखिर कब जागेगा? मीडिया में बने रहने के लिए विवाद खड़ा करना है या स्वच्छ और संगठित हिंदू समाज का निर्माण करना है?”** उन्होंने कहा कि समाज को यह तय करना होगा कि उसकी प्राथमिकता केवल बयानबाजी और विवादों के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराना है या वास्तव में एक संस्कारित, संगठित और सशक्त समाज का निर्माण करना है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब धार्मिक समितियों में पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर समान स्तर पर सवाल नहीं उठाए जाते, तो गरबा-डांडिया में भागीदारी के मुद्दे पर ही विरोध का माहौल क्यों बनाया जाता है? क्या धार्मिक आयोजनों के लिए अलग-अलग नियम और अलग-अलग कसौटियां होनी चाहिए? उनके अनुसार, इन सवालों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
### सोशल मीडिया की बयानबाजी से नहीं होगी सनातन की रक्षा…….
आजसू प्रवक्ता ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने, बयान जारी करने या किसी आयोजन का विरोध करने से नहीं होगी। इसके लिए समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करना, युवाओं को संस्कार देना, गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना तथा धार्मिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही शिक्षा और सामाजिक संगठन को मजबूत बनाने पर भी ध्यान देना होगा।
### सभी के लिए समान कसौटी की वकालत……..
अप्पू तिवारी ने कहा कि यदि गरबा और डांडिया में गैर-हिंदुओं की भागीदारी का विरोध किया जाता है, तो धार्मिक समितियों में गैर-हिंदू पदाधिकारियों की नियुक्ति पर भी समान कसौटी पर विचार होना चाहिए। एक जगह सुविधा के अनुसार उदारता और दूसरी जगह विरोध का रवैया अपनाने से समाज के सामने सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने हिंदू समाज के जागरूक नागरिकों और धार्मिक संगठनों से अपील की कि वे विवादों में उलझने के बजाय सामाजिक सुधार, धार्मिक मर्यादा, पारदर्शिता और संगठन निर्माण को प्राथमिकता दें. अप्पू तिवारी ने कहा कि सनातन समाज को दिखावे की नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति और मजबूत चरित्र की जरूरत है। धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए संस्थाओं की कार्यप्रणाली पारदर्शी बनाई जानी चाहिए और समाजहित से जुड़े निर्णयों में दोहरे मापदंडों से बचना चाहिए।


