जमशेदपुर : झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर सोमवार को पूर्वी सिंहभूम जिला समिति की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में जमशेदपुर डीसी कार्यालय के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंककर विरोध जताया और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शन का नेतृत्व पूर्वी सिंहभूम जिला जेएमएम अध्यक्ष विक्टर सोरेन ने किया। मौके पर पोटका विधायक संजीव सरदार, पार्टी के वरिष्ठ महासचिव मोहन कर्मकार, वरिष्ठ नेता हिदायतुल्लाह खान, पूर्व विधायक सह केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल सारंगी, राजू गिरी, शेख बदरुद्दीन, समद अंसारी, फैयाज खान, प्रमोद लाल, आस्तिक महतो समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता एवं महिला नेत्रियां मौजूद थीं।

‘कानून और संविधान बदलने का अधिकार चुनाव आयोग को नहीं’…….
सभा को संबोधित करते हुए जेएमएम के वरिष्ठ नेता हिदायतुल्लाह खान ने एसआईआर और मतदाता सूची की मैपिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कानून में बदलाव अथवा संविधान में संशोधन करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। उनके अनुसार एसआईआर के तहत फॉर्म-6 और मैपिंग को लेकर सामने आई शर्तों पर गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया और कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, संवैधानिक और कानूनी दायरे में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और किसी भी योग्य नागरिक को दस्तावेजी प्रक्रिया के कारण अपने मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. हिदायतुल्लाह खान ने मांग की कि एसआईआर के बाद जिन राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं, वहां की चुनावी प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की कानूनी अथवा संवैधानिक अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
‘मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव’……
जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है। इसमें ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए, जिससे आम नागरिक अपने मताधिकार से वंचित हो जाए। उन्होंने कहा कि जेएमएम जनता के लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठाता रहेगा. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक पहुंचकर लोगों को एसआईआर की प्रक्रिया की जानकारी देने तथा उनकी समस्याओं और आशंकाओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की अपील की।
कुणाल सारंगी बोले—पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी……..
जेएमएम के केंद्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक कुणाल सारंगी ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ना, हटाना अथवा किसी मतदाता से दस्तावेज मांगना बेहद संवेदनशील विषय है। ऐसी प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन बेहद जरूरी है. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर सक्रिय रहने और आम मतदाताओं का मार्गदर्शन करने की अपील की, ताकि किसी योग्य नागरिक का नाम केवल दस्तावेजी जटिलताओं के कारण प्रभावित न हो।
एसआईआर प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग…….
पोटका विधायक संजीव सरदार ने कहा कि एसआईआर के दौरान आम लोगों को दस्तावेज और मैपिंग से जुड़ी प्रक्रिया में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि पूरी प्रक्रिया को सरल और आम नागरिकों के लिए सुगम बनाया जाए, ताकि वास्तविक मतदाताओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े. प्रदर्शन के दौरान जेएमएम कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई। नेताओं ने कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण, पुराने मतदाता अभिलेखों की मैपिंग, नामों की जांच और नाम हटाने की प्रक्रिया में संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए. जेएमएम नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची से किसी योग्य नागरिक का नाम प्रभावित होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर विषय हो सकता है। पार्टी ने चुनाव आयोग से एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों का स्पष्ट जवाब देने तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
