जमशेदपुर : एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पिछले वर्ष हुए छत हादसे में मृतकों के परिजनों को मुआवजा और मृत्यु प्रमाण पत्र से संबंधित जानकारी नहीं मिलने का मामला अब झारखंड राज्य सूचना आयोग पहुंच गया है। जन विकास मंच के अध्यक्ष सौरभ विष्णु ने झारखंड राज्य सूचना आयोग (JSIC) के समक्ष द्वितीय अपील दायर की है। उनका आरोप है कि एमजीएम अस्पताल के जन सूचना पदाधिकारी की ओर से उनके आरटीआई आवेदन का निर्धारित अवधि में जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद दायर प्रथम अपील पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. जानकारी के अनुसार, 3 मई 2025 को एमजीएम अस्पताल के मेडिसिन विभाग के समीप छत का एक हिस्सा गिर गया था। हादसे में मरीज डेविड जॉनसन, लुकास साइमन तिर्की और श्रीचंद तांती की मौत हो गई थी। घटना के बाद राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजन को पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की गई थी।

मुआवजा और मृत्यु प्रमाण पत्र की मांगी थी जानकारी….
सौरभ विष्णु ने 11 जून 2026 को आरटीआई आवेदन दाखिल कर यह जानकारी मांगी थी कि हादसे में मृत तीनों मरीजों के परिजनों को घोषित मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है या नहीं। यदि भुगतान नहीं हुआ है तो इसके पीछे क्या कारण है, इसकी भी जानकारी मांगी गई थी। इसके अलावा मृतकों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जाने से संबंधित जानकारी भी मांगी गई थी. उनका कहना है कि आरटीआई अधिनियम के तहत निर्धारित 30 दिनों की अवधि में आवेदन का कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने 21 जुलाई 2026 को प्रथम अपील दायर की, लेकिन उस पर भी कोई जवाब नहीं मिलने के बाद अब राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दाखिल की गई है।
“यह केवल सूचना नहीं, जवाबदेही का सवाल”……
सौरभ विष्णु ने कहा कि एमजीएम हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों को घटना के एक वर्ष से अधिक समय बाद भी मुआवजे और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़ी स्पष्ट जानकारी नहीं मिलना गंभीर विषय है. उन्होंने कहा, “आरटीआई प्रक्रिया के दो चरण बिना जवाब के बीत चुके हैं। यह द्वितीय अपील केवल सूचना प्राप्त करने का मामला नहीं है, बल्कि शोकाकुल परिवारों के प्रति बुनियादी जवाबदेही का सवाल है।”
धारा 20 के तहत कार्रवाई की मांग…..
द्वितीय अपील के माध्यम से राज्य सूचना आयोग से एमजीएम अस्पताल को मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। साथ ही प्रथम अपीलीय पदाधिकारी की ओर से निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं किए जाने की जांच की मांग की गई है. इसके अलावा अपील में जन सूचना पदाधिकारी के विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 के तहत शास्ति की कार्रवाई पर विचार करने का भी अनुरोध किया गया है. मामले में अब राज्य सूचना आयोग के स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
