नई दिल्ली : भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, चीनी के दाम में तेजी केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है। ब्राजील, भारत, थाईलैंड समेत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में उत्पादन, मौसम और गन्ने के बढ़ते इथेनॉल उपयोग का असर वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है। प्रमुख निर्यातक देशों में आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है. सरकार के अनुसार, भारत में चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण एक साथ जिम्मेदार हैं। घरेलू उत्पादन अनुमान से कम रहने की संभावना, त्योहारों से पहले मांग में वृद्धि, प्रतिकूल मौसम, गन्ने की फसल को नुकसान और वैश्विक बाजार में सीमित उपलब्धता ने कीमतों को प्रभावित किया है।

उत्पादन अनुमान में बड़ी गिरावट……
वर्तमान पेराई सत्र में भारत में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले गन्ना उत्पादक राज्यों की ओर से शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख मीट्रिक टन का लगाया गया था। उत्पादन अनुमान में कमी ने बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है. गन्ने की फसल कई क्षेत्रों में लाल सड़न और शीर्ष छेदक रोग से प्रभावित हुई है। इसके अलावा समय से पहले हुई भारी बारिश और जलभराव ने भी फसल को नुकसान पहुंचाया है। हालांकि उत्पादन में कमी की आशंका है, लेकिन सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त चीनी भंडार मौजूद है और अगले पेराई सत्र के शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
ब्राजील पर टिकी वैश्विक बाजार की नजर……
वैश्विक चीनी बाजार में ब्राजील की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक देशों में शामिल ब्राजील की वैश्विक गन्ना उत्पादन में करीब 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि भारत की हिस्सेदारी लगभग 16 प्रतिशत है. ब्राजील में गन्ने का एक बड़ा हिस्सा अब इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल किया जा रहा है। गन्ने का अधिक उपयोग ईंधन के लिए इथेनॉल बनाने में होने से चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा कम हो सकती है। इसका सीधा असर वैश्विक चीनी आपूर्ति पर पड़ने की आशंका है।
ब्राजील में भी उत्पादन घटने का अनुमान……
ब्राजील की राष्ट्रीय आपूर्ति कंपनी के अनुमान के मुताबिक, देश में चीनी उत्पादन में करीब 3 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इस दौरान उत्पादन लगभग 43 मिलियन टन रहने का अनुमान है. ब्राजील के मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसम ने गन्ने की फसल को प्रभावित किया है। बारिश में देरी और बढ़ते तापमान के कारण उत्पादन पर दबाव पड़ने की आशंका है। ऐसे में यदि चीनी उत्पादन घटता है और गन्ने का अधिक हिस्सा इथेनॉल बनाने में जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की उपलब्धता और सीमित हो सकती है।
मौसम भी बना बड़ी चुनौती….
वैश्विक चीनी बाजार पर मौसम का असर भी साफ दिखाई दे रहा है। अल नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियों के कारण कई प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में बारिश के पैटर्न और तापमान में बदलाव देखने को मिल रहा है। भारत और थाईलैंड जैसे देशों में प्रतिकूल मौसम गन्ने की पैदावार के लिए चुनौती बन सकता है. थाईलैंड वैश्विक गन्ना उत्पादन में करीब 6 प्रतिशत योगदान देता है। वहां बारिश में कमी और मौसम में बदलाव से गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। भारत, ब्राजील और थाईलैंड जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन प्रभावित होने पर वैश्विक बाजार में चीनी की कमी और बढ़ सकती है।
अमेरिकी बाजार में भी तेजी…..
अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता का असर अमेरिकी कमोडिटी बाजार पर भी दिख रहा है। वहां चीनी वायदा कीमतें 17 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर बनी हुई हैं और मई 2025 के बाद के ऊंचे स्तर के करीब कारोबार कर रही हैं. कुल मिलाकर, घरेलू उत्पादन में संभावित कमी, त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग, ब्राजील में गन्ने के इथेनॉल की ओर बढ़ते उपयोग और प्रमुख उत्पादक देशों में मौसम की चुनौती ने चीनी बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि भारत में पर्याप्त भंडार होने का सरकारी दावा है, लेकिन आने वाले दिनों में उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति की स्थिति पर बाजार की नजर बनी रहेगी।



























































