सना : यमन में वर्षों से जारी गृहयुद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हूती विद्रोहियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में लड़ रहे सुरक्षा बलों के बीच पश्चिमी ताइज और लाल सागर के तटीय इलाकों में भीषण संघर्ष छिड़ गया है। गुरुवार से शुरू हुई इस लड़ाई में अब तक 129 लोगों के मारे जाने की खबर है। इसे हाल के वर्षों में यमन में हुई सबसे घातक सैन्य झड़पों में से एक माना जा रहा है. मौजूदा संघर्ष का सबसे गंभीर पहलू हूती विद्रोहियों का बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की दिशा में बढ़ता दबाव है। गुरुवार को हूती लड़ाकों ने पश्चिमी ताइज प्रांत में कई सरकारी सैन्य ठिकानों पर जमीनी हमला किया। इस दौरान रॉकेट, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के इस्तेमाल की भी खबर है।

रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जे की कोशिश……
सैन्य सूत्रों के अनुसार, हूती लड़ाकों ने लाल सागर के करीब ताइज क्षेत्र में कई ऊंचाई वाले रणनीतिक ठिकानों पर कब्जा करने की कोशिश की। इन पहाड़ी इलाकों पर नियंत्रण मिलने से सरकारी बलों की गतिविधियों के साथ-साथ मोखा बंदरगाह और बाब अल-मंदेब की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों पर निगरानी आसान हो सकती है।
मोखा बंदरगाह क्यों है महत्वपूर्ण?…….
हूतियों के मौजूदा अभियान में मोखा (अल-मखा) बंदरगाह और उसके आसपास का इलाका बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लाल सागर के तट पर स्थित यह बंदरगाह बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब है. सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, अगर हूती आसपास की ऊंचाइयों पर अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल होते हैं, तो वे तटीय क्षेत्र की ओर दबाव बढ़ा सकते हैं। इससे सरकारी नियंत्रण वाले मोखा को अलग-थलग करने और वहां तक पहुंचने वाले सैन्य एवं आपूर्ति मार्गों पर दबाव बनाने में उन्हें रणनीतिक लाभ मिल सकता है. इससे पहले अगस्त में भी मोखा बंदरगाह हूती हमलों का निशाना बना था। यमनी अधिकारियों के अनुसार, उस दौरान बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया था, जिससे बंदरगाह के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा था।
सरकारी बलों ने किया पलटवार……
हूतियों की शुरुआती बढ़त के बाद यमनी सरकारी बलों ने जवाबी हमला शुरू कर दिया है। शुक्रवार को सरकारी सेना ने पश्चिमी ताइज के जबल हबाशी इलाके में अल-खजान और अल-मकहाना की पहाड़ियों को दोबारा अपने नियंत्रण में लेने का दावा किया. सरकारी बलों और उनके सहयोगी सैनिकों ने हूती ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की। इससे साफ है कि संघर्ष अब केवल एक सीमित मोर्चे तक नहीं रह गया है, बल्कि ताइज से लेकर लाल सागर के तटीय इलाकों तक इसका दायरा फैलता जा रहा है।
अदन से ताइज भेजे गए अतिरिक्त सैनिक……
हूतियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए यमनी सरकार ने ताइज क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं। एक यमनी अधिकारी के मुताबिक, अदन से ताइज के लिए सैनिक रवाना किए गए हैं। बताया गया है कि यह कदम सऊदी अरब के आग्रह पर उठाया गया. यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का मुख्यालय अदन में है, जबकि हूती विद्रोही राजधानी सना समेत देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं। ऐसे में ताइज और लाल सागर के बीच का क्षेत्र दोनों पक्षों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक इलाका बन गया है।
2022 के बाद सबसे बड़ा सैन्य तनाव…….
यमन में अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से युद्धविराम के बाद कई मोर्चों पर अपेक्षाकृत शांति बनी रही थी। हालांकि, हाल के महीनों में तनाव फिर बढ़ने लगा। जुलाई में संघर्ष विराम की स्थिति कमजोर पड़ने के बाद हूतियों और सरकारी बलों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हो गईं. मौजूदा अभियान को 2022 के बाद हूतियों के सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक माना जा रहा है।
बाब अल-मंदेब पर दुनिया की नजर…….
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य केवल यमन के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। लाल सागर के रास्ते स्वेज नहर के जरिए यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार होता है. ऐसे में यदि संघर्ष के कारण बाब अल-मंदेब के आसपास जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री बीमा, माल ढुलाई और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है. गाजा युद्ध शुरू होने के बाद 2023 से हूतियों ने लाल सागर से गुजरने वाले कई जहाजों को निशाना बनाया था। इसके चलते वैश्विक शिपिंग कंपनियों की सुरक्षा संबंधी चिंताएं पहले ही बढ़ चुकी हैं।
रणनीतिक बढ़त हासिल करना चाहते हैं हूती……
विशेषज्ञों और क्षेत्रीय अधिकारियों के आकलन के अनुसार, हूतियों का मौजूदा अभियान केवल कुछ पहाड़ियों या सैन्य ठिकानों पर कब्जे तक सीमित नहीं है। उनका लक्ष्य बाब अल-मंदेब के आसपास की ऊंचाइयों और मोखा तक पहुंचने वाले रास्तों पर दबाव बढ़ाकर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करना हो सकता है. यदि हूती बाब अल-मंदेब या मोखा बंदरगाह के आसपास अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल होते हैं, तो भविष्य में यमनी सरकार और सऊदी अरब के साथ किसी भी संभावित बातचीत में उनकी सौदेबाजी की ताकत बढ़ सकती है।
आगे क्या?……
फिलहाल ताइज और मोखा के बीच कई मोर्चों पर तनाव बरकरार है। सरकारी बल हूती बढ़त को रोकने के लिए अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती और जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। वहीं हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब के आसपास रणनीतिक ऊंचाइयों और तटीय इलाकों की ओर अपना दबाव बढ़ाने की कोशिश में हैं. अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है और मोखा या बाब अल-मंदेब के आसपास सैन्य नियंत्रण का संतुलन बदलता है, तो इसका असर यमन के गृहयुद्ध से कहीं आगे तक जा सकता है। लाल सागर के इस महत्वपूर्ण समुद्री गलियारे में किसी बड़े व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग, माल ढुलाई और ऊर्जा बाजारों पर एक बार फिर दबाव बढ़ने की आशंका है।
