आदित्यपुर : आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र—जिसकी पहचान कभी एशिया के प्रमुख लघु औद्योगिक क्षेत्रों में होती थी—आज बुनियादी समस्याओं के जाल में उलझा नजर आ रहा है। जर्जर सड़कें, जलजमाव, बंद नालियां, खराब स्ट्रीट लाइट और वर्षों से अधूरे पड़े सड़क मरम्मत कार्यों ने औद्योगिक क्षेत्र की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन समस्याओं के बीच उद्यमियों की आवाज उठाने वाला संगठन एशिया (उद्यमी संगठन) आखिर खामोश क्यों है?

वह दौर भी था, जब एक फोन पर पहुंच जाती थी पूरी टीम…….
उद्यमियों के बीच चर्चा है कि एक समय एशिया की सक्रियता ऐसी थी कि किसी सामान्य उद्यमी की समस्या की सूचना मिलते ही अध्यक्ष समेत पूरी टीम मौके पर पहुंच जाती थी। पूर्व अध्यक्ष विक्टर सिंह, प्रमोद सिंह समेत अन्य पदाधिकारियों के कार्यकाल को याद करते हुए उद्यमी बताते हैं कि संगठन की आवाज प्रशासन तक मजबूती से पहुंचती थी. समय बदला और संगठन की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे। आरोप लगाया जाता है कि संगठन के भीतर प्रभाव और नियंत्रण की राजनीति ने उसकी सक्रियता को प्रभावित किया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
हल्की बारिश और पूरा औद्योगिक क्षेत्र बेहाल……
हाल की हल्की बारिश ने आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की जमीनी हकीकत सामने ला दी। कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति बन गई। मुख्य मार्गों पर नाली का पानी बहता नजर आया, जबकि कई स्थानों पर ड्रेन और नालियां पूरी तरह जाम हैं. उद्यमियों का कहना है कि लगभग एक दशक पहले सीवरेज, पेयजल और गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए जिन सड़कों को तोड़ा गया था, उनमें से कई की अब तक समुचित मरम्मत नहीं हुई। इसका सीधा असर उद्योगों तक आने-जाने वाले कामगारों, उद्यमियों और मालवाहक वाहनों पर पड़ रहा है. विभिन्न फेज की जर्जर सड़कें, जाम नालियां और जलनिकासी की बदहाल व्यवस्था औद्योगिक क्षेत्र की रोजमर्रा की तस्वीर बन चुकी है।
स्ट्रीट लाइट नहीं जलती, फिर भी शुल्क देना पड़ता है?…….
समस्याओं की इस लंबी सूची में स्ट्रीट लाइट का मुद्दा भी प्रमुख है। उद्यमियों के बीच सवाल उठ रहा है कि जब कई जगह स्ट्रीट लाइट पर्याप्त रूप से काम नहीं कर रही हैं, तो उसके एवज में निर्धारित शुल्क का भुगतान क्यों किया जा रहा है? दावा है कि स्ट्रीट लाइट शुल्क को लेकर औद्योगिक संगठन की ओर से लिखित सहमति दी गई थी। यदि ऐसा है तो उद्यमियों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सुविधा का लाभ नियमित रूप से नहीं मिल रहा, तब शुल्क की व्यवस्था की समीक्षा क्यों नहीं होती?
‘उद्यमियों की आवाज’ पर ही उठने लगे सवाल……
कहने को एशिया उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए बनाया गया संगठन है, लेकिन लंबे समय से जर्जर सड़क, नाली, बिजली और अपराध जैसी समस्याओं को लेकर संगठन की सड़क पर उतरकर सक्रियता नजर नहीं आने की शिकायतें सामने आ रही हैं. उद्यमियों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियों पर दबाव बनाने के लिए ठोस आंदोलन की जगह कई बार ज्ञापन सौंपने और अधिकारियों से मुलाकात तक ही गतिविधियां सीमित रह जाती हैं। इससे संगठन की भूमिका और उसकी प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिकारियों के सम्मान में महंगे मोमेंटो पर भी उठे सवाल……
इसी बीच संगठन की कार्यशैली को लेकर एक और मुद्दा चर्चा में है। सरायकेला-खरसावां जिले में पदस्थापित एक सरकारी अधिकारी के स्वागत के दौरान उन्हें चांदी जड़ित बेशकीमती मोमेंटो दिए जाने की चर्चा है. आलोचकों का सवाल है कि जब औद्योगिक क्षेत्र की सड़कें जर्जर हैं, नालियां जाम हैं, जलजमाव की समस्या बनी हुई है और उद्यमी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं, तब अधिकारियों के स्वागत-सम्मान पर इतना जोर क्यों?
क्या ऐसे भव्य सम्मान महज शिष्टाचार हैं या फिर संगठन और प्रशासन के बीच बेहतर संबंध बनाने की कवायद? यह सवाल अब उद्यमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
समस्या सड़क पर, संगठन खामोश—आखिर क्यों?…..
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की समस्याएं आज किसी एक उद्योग या एक उद्यमी तक सीमित नहीं हैं। ये समस्याएं सीधे तौर पर उद्योगों के संचालन, कामगारों की आवाजाही और पूरे औद्योगिक क्षेत्र की छवि से जुड़ी हैं।
सबसे बड़ा सवाल …….
जब सड़कें जर्जर हैं, नालियां जाम हैं, बारिश में औद्योगिक क्षेत्र डूब जाता है और स्ट्रीट लाइट को लेकर भी सवाल हैं, तो उद्यमियों की आवाज बुलंद करने वाला संगठन आखिर चुप क्यों है? आदित्यपुर को सिर्फ उद्योगों का शहर नहीं, बल्कि बेहतर औद्योगिक आधारभूत संरचना वाला क्षेत्र बनाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
