चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम) : झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे निर्णायक अभियान को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने के लिए सुरक्षा बलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी सिलसिले में आज पश्चिम सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक (DG) और महानिरीक्षक (IG – ऑपरेशंस) की उपस्थिति में एक बेहद संवेदनशील और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य कोल्हान और सारंडा के जंगलों में सक्रिय नक्सलियों के बचे-खुचे दस्तों को पूरी तरह से समाप्त करना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक अभेद्य बनाना है।



रणनीति के मुख्य बिंदु और बड़े फैसले:
- इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशंस पर जोर : बैठक में तय किया गया कि अब आने वाले दिनों में और अधिक सटीक खुफिया इनपुट (Intelligence Inputs) के आधार पर टारगेटेड सर्च ऑपरेशन चलाए जाएंगे, ताकि सुरक्षा बलों को कम से कम जोखिम हो और सफलता दर शत-प्रतिशत रहे।
- फॉरवर्ड कैंपों की मजबूती : सारंडा और पोड़ाहाट के सुदूरवर्ती इलाकों में हाल ही में स्थापित किए गए नए सुरक्षा कैंपों (Security Camps) की समीक्षा की गई। इन कैंपों के माध्यम से नक्सलियों के सप्लाई लाइन और उनके मूवमेंट कॉरिडोर को पूरी तरह ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया है।
- लोकल पुलिस के साथ बेहतर समन्वय : CRPF, झारखंड जगुआर और जिला बल के बीच रियल-टाइम इन्फॉर्मेशन शेयरिंग को और बेहतर बनाने पर चर्चा हुई ताकि किसी भी इनपुट पर तुरंत क्विक एक्शन लिया जा सके।
- IED नेटवर्क को ध्वस्त करना : कोल्हान के जंगलों में नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के लिए बिछाए गए प्रेशर आईईडी (IED) के जाल को डिफ्यूज करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी उपकरणों और डॉग स्क्वायड की मदद से सघन चेकिंग अभियान चलाने की रणनीति बनी।
अधिकारियों का कड़ा संदेश :
बैठक में शामिल शीर्ष अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि झारखंड की धरती से नक्सलियों का पूरी तरह सफाया होने तक यह अभियान रुकने वाला नहीं है। आत्मसमर्पण न करने वाले बचे हुए नक्सलियों के खिलाफ अब और अधिक आक्रामक और निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।



