जमशेदपुर : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच टेल्को कॉलोनी मंडल कांग्रेस अध्यक्ष देबाशीष घोष ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. देबाशीष घोष ने कहा कि मतदाता सूची महज एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि नागरिकों के लोकतांत्रिक और मतदान के अधिकार का आधार है। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के प्रति जनता का विश्वास लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी है। यदि SIR और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं, तो उनका सार्वजनिक और स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए. देबाशीष घोष ने हालिया मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ निर्णयों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवालों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए। SIR की प्रक्रिया में यदि एक भी वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित होता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।”
इन मांगों को लेकर उठाई आवाज… देबाशीष घोष ने मांग की कि..
– SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
– SIR के दौरान मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष समीक्षा हो।
– पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायतों की समयबद्ध जांच कर समाधान सुनिश्चित किया जाए।
– निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों पर पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाए।
– मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका और कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा कर संवैधानिक प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा के मुद्दे पर अपनी आवाज उठाती रहेगी। साथ ही उन्होंने टेल्को कॉलोनी और जमशेदपुर के नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की।
गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने हालिया विवाद पर कहा है कि अलग-अलग राय और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं तथा पिछले एक वर्ष में आयोग के निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
