जमशेदपुर : शहर में हाल के दिनों में लूट, हत्या और गोलीबारी जैसी घटनाओं को लेकर कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। गोलमुरी में बैंक डकैती और उसके बाद बिंदल मॉल के पास फायरिंग की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। बैंक डकैती में हथियारबंद अपराधियों द्वारा बड़ी वारदात को अंजाम देने तथा मॉल फायरिंग में कई लोगों के घायल होने की घटनाएं हालिया पुलिस रिकॉर्ड में सामने आई हैं. इसी बीच इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन, जमशेदपुर के नेशनल डायरेक्टर डॉ. जी. जयारामदास ने पूर्वी सिंहभूम के एसएसपी और उपायुक्त (डीसी) से शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता से ठोस कदम उठाने की अपील की है।

डॉ. जयारामदास ने कहा कि “एक बार फिर विनम्र निवेदन है कि जमशेदपुर की वर्तमान स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अपराध नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। हमारा उद्देश्य किसी अधिकारी की आलोचना करना नहीं, बल्कि आम जनता को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है।” उन्होंने कहा कि दुर्गापूजा, दीपावली और छठ जैसे महत्वपूर्ण पर्व नजदीक हैं। इन पर्वों के दौरान बाजारों, प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही काफी बढ़ जाती है। ऐसे में पुलिस की सक्रियता और अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई बेहद जरूरी है।
डॉ. अजय कुमार के कार्यकाल का दिया उदाहरण
डॉ. जयारामदास ने जमशेदपुर के पूर्व एसपी डॉ. अजय कुमार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में शहर में अपराध और माफिया गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए कड़े पुलिसिंग कदम उठाए गए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार डॉ. अजय कुमार 1994 से 1996 के बीच जमशेदपुर के एसपी रहे और उनके कार्यकाल में अपराध नियंत्रण को लेकर उनकी पुलिसिंग की व्यापक चर्चा हुई थी।
उन्होंने कहा कि “उस समय जमशेदपुर में अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और बेहतर पुलिसिंग के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया गया था। आज भी उसी तरह की सक्रिय, सतर्क और जवाबदेह पुलिसिंग की जरूरत महसूस हो रही है।” साथ ही उन्होंने वर्तमान एसएसपी की ओर से की जा रही निगरानी और अपराध नियंत्रण की कोशिशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एसएसपी और पुलिस अधिकारी 24×7 निगरानी के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने में लगे हैं, लेकिन आगामी पर्वों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। सितंबर में एसएसपी डॉ. ऐहतेशाम वकारिब की अध्यक्षता में अपराध समीक्षा बैठक भी हुई थी, जिसमें अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे।
“जनता भयमुक्त हो, यही हमारी प्राथमिक मांग”…….
डॉ. जी. जयारामदास ने कहा कि मानवाधिकार मिशन की कार्यसमिति की मुख्य चिंता आम नागरिकों की सुरक्षा है। उन्होंने प्रशासन से अपराधियों के खिलाफ सख्त और कानूनसम्मत कार्रवाई करने, संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने तथा पर्वों के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की. उन्होंने कहा, “जनता को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए। अपराधी बेखौफ न रहें और आम नागरिक अपने घर से निकलने में डर महसूस न करें—हमारी यही विनम्र मांग है।”
