जमशेदपुर : शिक्षक पात्रता परीक्षा (J-TET) में भोजपुरी, मगही एवं अंगिका भाषाओं को शामिल नहीं किए जाने पर विरोध तेज हो गया है। भोजपुरी नव चेतना मंच के प्रांतीय अध्यक्ष Appu Tiwari ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस निर्णय को जनभावनाओं की अनदेखी और क्षेत्रीय भाषाओं के साथ अन्याय बताया है।



उन्होंने कहा कि झारखंड सहित आसपास के क्षेत्रों में भोजपुरी, मगही और अंगिका व्यापक रूप से बोली व समझी जाती हैं। इसके बावजूद इन भाषाओं को परीक्षा से बाहर रखना लाखों अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन है और यह सरकार की नीतिगत असंवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह फैसला जनहित के विरुद्ध है, जिससे विभिन्न वर्गों में आक्रोश व्याप्त है।
Appu Tiwari ने यह भी आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस पहल या स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जो चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि विधायी स्तर पर भी इस विषय पर चुप्पी बनाए रखना गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि क्षेत्रीय भाषाओं की लगातार उपेक्षा होती रही, तो इससे सांस्कृतिक असंतुलन और भाषाई असमानता बढ़ेगी।
मंच की ओर से मांग की गई है कि आगामी J-TET परीक्षा में तत्काल प्रभाव से भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को शामिल किया जाए, ताकि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके। चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा. अंत में कहा गया कि क्षेत्रीय भाषाएं सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता की आधारशिला हैं, ऐसे में उनकी अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी।
