विकास सिंह बोले– ऐसी परिस्थितियों में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा शर्मसार होता है, परिवार को संकट से निकालने के लिए व्यवस्था को आगे आना होगा
जमशेदपुर : मानगो के शंकोसाई स्थित केदार बगान के पास एक बेहद चिंताजनक घटना सामने आई है। पारिवारिक कलह और आर्थिक तंगी से परेशान एक महिला ने अपनी तीन मासूम बेटियों के साथ कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि समय रहते पड़ोसी की तत्परता से चारों को इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल पहुंचाया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, महिला पिछले कुछ समय से पारिवारिक विवाद और आर्थिक परेशानियों से जूझ रही थी। इन्हीं परिस्थितियों से परेशान होकर उसने अपनी तीनों बच्चियों के साथ यह आत्मघाती कदम उठा लिया। घटना की जानकारी महिला के पड़ोसी अजय कुमार को मिली। उन्होंने बिना देर किए मानवीय संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए महिला और तीनों बच्चियों को एमजीएम अस्पताल पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी पहल से चारों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकी।
बताया जाता है कि अजय कुमार सामाजिक कार्यकर्ता विकास सिंह के मित्र हैं। उन्होंने घटना की जानकारी विकास सिंह को दी। इसके बाद विकास सिंह भी मामले को लेकर सक्रिय हुए। उन्होंने एमजीएम अस्पताल में चारों के इलाज की व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए अस्पताल अधीक्षक से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी देते हुए बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से महिला और तीनों बच्चियों के इलाज में विशेष गंभीरता बरतने का आग्रह किया।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारे पर उठाए सवाल……
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए विकास सिंह ने कहा कि देश में एक ओर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा बुलंद किया जाता है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक बदहाली और पारिवारिक कलह से जूझ रहे परिवारों की ऐसी स्थिति समाज और व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि एक मां का अपनी तीन मासूम बेटियों के साथ इस हद तक टूट जाना बेहद पीड़ादायक है। यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने की व्यवस्था पर भी सवाल है।
सिर्फ घटना नहीं, इसके पीछे की वजहों की भी हो जांच
विकास सिंह ने मांग की कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। पुलिस को पारिवारिक विवाद की वास्तविक वजहों का पता लगाना चाहिए और यह भी देखना चाहिए कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं, जिनके कारण महिला इस हद तक मानसिक और पारिवारिक दबाव में पहुंच गई। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद परिवारों को समय रहते आर्थिक, सामाजिक और मानसिक सहयोग मिलना बेहद जरूरी है, ताकि किसी परिवार को इस तरह के भयावह हालात का सामना नहीं करना पड़े।




