जमशेदपुर/पोटका : पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में मलेरिया का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र में लगातार बढ़ते संक्रमण और हाल ही में एक और बच्चे की दुखद मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित और सख्त कार्रवाई की है।

लापरवाही पर एक्शन
मलेरिया नियंत्रण कार्यों में ढिलाई बरतने और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के आरोप में स्वास्थ्य विभाग ने पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रजनी महाकुड़ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रशासन की ओर से इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए डॉ. सुकांत सीट को पोटका सीएचसी का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है।
प्रशासन की चेतावनी और निर्देश
उपायुक्त राजीव रंजन ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ आपातकालीन समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने मलेरिया जांच की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जताई और निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
- लक्ष्य: अगले 4 दिनों के भीतर जिले में मलेरिया जांच की संख्या को बढ़ाकर 1 लाख तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
- सघन निगरानी: पोटका के साथ-साथ घाटशिला, डुमरिया और मुसाबनी ब्लॉकों में विशेष निगरानी दल तैनात किए गए हैं।
- सुविधाएं: सभी स्वास्थ्य केंद्रों को पर्याप्त मात्रा में आरडीटी (RDT) किट, एंटी-मलेरिया दवाओं और एंबुलेंस की 24/7 उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
क्षेत्र में अलर्ट
प्रशासन ने प्रभावित गांवों में फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव का अभियान तेज कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि तेज बुखार, कपकपी या किसी भी प्रकार की कमजोरी महसूस होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचकर मलेरिया की जांच कराएं। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि मलेरिया का समय रहते इलाज ही जीवन बचा सकता है।

