रांची : झारखंड अब परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाने की तैयारी में है। नई दिल्ली में आयोजित ‘नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन 2026’ के दौरान, झारखंड सरकार ने जिंदल न्यूक्लियर पावर प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक प्रमुख समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

मुख्य बिंदु:
- निवेश: इस महत्वाकांक्षी परियोजना में लगभग ₹30,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा।
- क्षमता: राज्य में 1400 मेगावाट का अत्याधुनिक न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा।
- उद्देश्य: राज्य को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करना और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए 24/7 निर्बाध बिजली सुनिश्चित करना।
- रोजगार: इस मेगा प्रोजेक्ट से हजारों की संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
झारखंड के विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
परमाणु ऊर्जा न केवल स्वच्छ है, बल्कि यह कोयला आधारित संयंत्रों के मुकाबले अधिक स्थिर बिजली प्रदान करती है। यह प्लांट झारखंड के स्टील और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देगा और भारत के ‘नेट-जीरो’ लक्ष्यों को प्राप्त करने में राज्य की भागीदारी को सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पहल को राज्य के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। जिंदल ग्रुप के साथ हुए इस समझौते को झारखंड को एक ‘निवेशक-अनुकूल’ राज्य के रूप में स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। क्या आपको लगता है कि झारखंड में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगना राज्य के विकास के लिए गेम-चेंजर साबित होगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

