जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित डीडी बार (Double Down Bar) के बाहर 27 जून की रात हुए हिमांशु सिंह हत्याकांड और प्रत्युष आनंद पर जानलेवा हमले के मामले में जिला पुलिस और एसआईटी (SIT) की तफ्तीश अब अपने सबसे अंतिम और निर्णायक दौर में पहुंच गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने केस के चार मुख्य चश्मदीद गवाहों के बयान कोर्ट में कलमबंद कराए हैं, जिससे मुख्य साजिशकर्ताओं की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं।चार चश्मदीदों की गवाही, नीरज सिंह पर गंभीर आरोपपुलिस अनुसंधान और गवाहों के बयानों के आधार पर इस पूरे केस का केंद्र बिंदु अब भाजपा नेता और डीडी बार के संचालक नीरज सिंह बन चुके हैं।

गवाहों ने पुलिस और अदालत के सामने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:
- डराने-धमकाने का आरोप: गवाहों के अनुसार, नीरज सिंह अक्सर बार में आने वाले हिमांशु और उसके साथियों को डराया-धमकाया करता था।
- मुख्य हमलावर को बुलाने की पुष्टि: चश्मदीदों ने बताया कि घटना वाली रात नीरज सिंह ने ही फोन करके मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा को बार के बाहर बुलाया था, जिसके बाद इस खूनी वारदात को अंजाम दिया गया।
- सरकारी गवाह बनाने की तैयारी: पुलिस केस को अदालत में पूरी तरह अचूक बनाने के लिए इस कांड से जुड़े राहुल दुबे को सरकारी गवाह (Approver) बनाने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है, ताकि नीरज सिंह के खिलाफ सीधे साक्ष्य पेश किए जा सकें।
कोलकाता में भर्ती प्रत्युष आनंद के बयान पर टिकी निगाहेंइस हिंसक हमले में गंभीर रूप से घायल हुए प्रत्युष आनंद का इलाज वर्तमान में कोलकाता के एक अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों से हरी झंडी मिलते ही जमशेदपुर पुलिस की एक विशेष टीम कोलकाता जाकर प्रत्युष का आधिकारिक बयान दर्ज करेगी। प्रत्युष इस हमले का सबसे बड़ा भुक्तभोगी और जीवित गवाह है, इसलिए उसका बयान आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने में सबसे महत्वपूर्ण साबित होगा।अब तक सभी 16 आरोपी सलाखों के पीछेएसआईटी ने इस मामले में वैज्ञानिक, तकनीकी और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया था। राजस्थान के सीकर से गिरफ्तार किए गए बार संचालक नीरज सिंह को 72 घंटे की पुलिस रिमांड के बाद पहले ही जेल भेजा जा चुका है। वहीं, हाल ही में फरार आरोपी राघवेंद्र उर्फ ‘घेरे’ के कोर्ट में सरेंडर करने और गणेश महतो की गिरफ्तारी के बाद अब तक इस वारदात में शामिल सभी 16 आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल जा चुके हैं।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे बीएनआर (BNR) अनुसंधान के नियमों के तहत तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ रहे हैं, ताकि आरोपियों को अदालत से कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जा सके।

