जमशेदपुर : शहर की सामाजिक संस्था सत्यम सजीवन ट्रस्ट ने एक बार फिर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। ट्रस्ट के प्रयासों से पिछले कई दिनों से दर-दर भटकने को मजबूर एक बेसहारा वृद्ध महिला को सुरक्षित आश्रय (ओल्ड एज होम) दिलाया गया है।



अपनों ने छोड़ा साथ, ठोकरें खाने को थीं मजबूर
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित वृद्ध महिला मूल रूप से जमशेदपुर के गोलमुरी की रहने वाली हैं। उनका एक बड़ा परिवार था, जिसमें चार भाई और दो बहनें थीं। चारों भाइयों और एक बहन की शादी होने के बाद सभी अपने-अपने जीवन में व्यस्त होकर इधर-उधर चले गए। इस महिला ने जीवन भर शादी नहीं की थी। उम्र के इस पड़ाव पर जब अपनों के साथ की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब वह बिल्कुल अकेली और बेसहारा हो गईं। अपना पेट पालने के लिए वह बिरसानगर जोन नंबर 4 इलाके में कई दिनों से भटक रही थीं और कभी इस दरवाजे तो कभी उस दरवाजे मांगकर गुजारा कर रही थीं।
ट्रस्ट की अध्यक्ष ने बढ़ाया मदद का हाथ
भटकते हुए आखिरकार यह वृद्ध महिला सत्यम सजीवन ट्रस्ट के पास पहुंचीं और संस्थान की अध्यक्ष कंचन सिंह से मिलकर अपने रहने और खाने के लिए आश्रय की गुहार लगाई। महिला की इस दयनीय स्थिति और पीड़ा को देखते हुए कंचन सिंह ने बिना देर किए त्वरित कदम उठाया।
डिमना ओल्ड एज होम में मिली नई जिंदगी
सत्यम सजीवन ट्रस्ट की अध्यक्ष कंचन सिंह के व्यक्तिगत प्रयासों और तत्परता के कारण आज उस बेसहारा महिला को पूरे सम्मान के साथ डिमना ओल्ड एज होम पहुंचाया गया। अब उम्र के इस आखिरी पड़ाव में उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा और वहां उन्हें रहने, खाने के साथ-साथ उचित देखभाल और सम्मानजनक जीवन मिल सकेगा।
“समाज में बुजुर्गों को इस तरह लावारिस छोड़ देना बेहद दुखद है। हमारी संस्था का मुख्य उद्देश्य ही यही है कि कोई भी असहाय व्यक्ति खुद को अकेला न समझे। महिला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर आज मन को असीम संतुष्टि मिली है।”
— कंचन सिंह, अध्यक्ष (सत्यम सजीवन ट्रस्ट)



