जमशेदपुर : गोलमुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत कॉम्प्लेक्स मैदान के पास हुए कन्हैया यादव हत्याकांड के बाद पूरा इलाका सुलग उठा है। मृतक कन्हैया यादव के परिजनों, बस्तीवासियों और समर्थकों ने गोलमुरी मुख्य सड़क को जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। सड़क पर टायर जलाए गए, प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी हुई और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए।
गुस्से से भरे लोगों ने साफ शब्दों में कहा कि अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अगर समय रहते पुलिस सक्रिय होती, तो शायद आज कन्हैया यादव ज़िंदा होते।
“जब तक सांस थी, कोई सुनने नहीं आया, अब लाश पर क्यों शहर को जगाया?”
“इंसाफ मरने के बाद ही क्यों?” – प्रदर्शन में उठे तीखे सवाल……
प्रदर्शन के दौरान एक स्थानीय व्यक्ति का दर्द छलक पड़ा। उसने कहा “लोगों को इंसाफ मरने से पहले क्यों नहीं मिलता? मरने के बाद ही क्यों सड़क पर उतरना पड़ता है? गुंडा-मवाली और नेताओं को थाना में कुर्सी क्यों दी जाती है और आम लोगों को भगा दिया जाता है? आखिर क्यों?”
इन सवालों ने भीड़ में और आक्रोश भर दिया। महिलाओं ने भी मोर्चा संभाला और कहा कि अब डरकर घर में बैठने का वक्त नहीं है। बस्ती के युवाओं ने चेतावनी दी कि अगर जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र होगा।
“खून की हर बूंद पुकार रही है, चुप रहना अब गुनाह हो गया है।”
पुलिस के खिलाफ नारेबाज़ी, कार्रवाई की मांग…….
सड़क जाम के कारण घंटों तक यातायात बाधित रहा। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ इंसाफ की मांग पर अड़ी रही। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी हो, घटना की निष्पक्ष और तेज़ जांच हो, क्षेत्र में पुलिस गश्ती बढ़ाई जाए, दोषी पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि गोलमुरी थाना से कुछ ही दूरी पर इस तरह की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
तनावपूर्ण माहौल, प्रशासन अलर्ट……..
पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
“जिस शहर में कानून सो जाए, वहां इंसाफ को सड़कों पर आना पड़ता है…”
कन्हैया यादव हत्याकांड अब सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था पर जनता के भरोसे की परीक्षा बन गया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक और क्या ठोस कदम उठाता है।
