जमशेदपुर : जमशेदपुर के युवा कारोबारी कैरव गांधी के अपहरण को तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं। अपहरण जैसी गंभीर वारदात के बाद भी पुलिस सिर्फ “हवा में तीर” चलाती नजर आ रही है। न कोई ठोस सुराग, न कोई बड़ी सफलता — जिससे कारोबारी जगत में डर और आक्रोश दोनों गहराता जा रहा है।



🚨 चार टीमें, फिर भी नतीजा सिफर…..
कैरव गांधी को सुरक्षित छुड़ाने के लिए एसएसपी ने चार विशेष पुलिस टीमें गठित की हैं। इनमें से कुछ टीमें उत्तर प्रदेश और बिहार तक भेजी गई हैं, लेकिन सवाल यह है कि
👉 तीन दिन बाद भी आखिर पुलिस के पास क्या है?
📹 CCTV खंगालने में जुटी पुलिस……
पुलिस सोनारी के सीएच एरिया, सोनारी, बिष्टुपुर सहित कई इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है।
जांच का फोकस…..
क्या कैरव गांधी अपनी क्रेटा कार से इन इलाकों से गुजरे थे?
क्या किसी ने उनका पीछा किया?
पुलिस का मानना है कि यह वारदात किसी संगठित अपहरण गिरोह की है, जिसने पहले पूरी रेकी की और फिर बड़ी साजिश के तहत अपहरण को अंजाम दिया।
📞 गुमराह करने की साजिश?
सूत्रों के मुताबिक, अपहरणकर्ता इंटरनेट कॉल के जरिए पुलिस और परिजनों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। जिस नंबर से कॉल आया है, पुलिस उसे ट्रेस करने में जुटी है। तकनीक के इस दौर में कहीं से भी इंटरनेशनल कॉल करना आसान है —यही पुलिस की जांच को और उलझा रहा है।
🕰️ कैसे हुआ अपहरण ? पूरी टाइमलाइन…..
मंगलवार, दोपहर करीब 12 बजे :
कैरव गांधी घर से क्रेटा कार लेकर निकले
परिवार को बताया…..
👉 बिष्टुपुर SBI जाना है
👉 फिर आदित्यपुर स्थित कंपनी
👉 दोपहर 2 बजे तक लौटने की बात
दोपहर बाद फोन किया गया, मोबाइल स्विच ऑफ
रात 8 बजे……
👉 सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा के पास
👉 कार और मोबाइल फोन बरामद
पुलिस का आकलन है कि घर से निकलने के बाद और रात 8 बजे से पहले किसी भी समय कैरव गांधी का अपहरण किया गया।
कारोबारियों में दहशत…..
इस सनसनीखेज अपहरण से जमशेदपुर के कारोबारी वर्ग में डर का माहौल है।
सवाल उठ रहे हैं:
क्या शहर में कारोबारी अब सुरक्षित नहीं?
क्या संगठित अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं?
❓ सबसे बड़ा सवाल…..
तीन दिन बीत चुके हैं…
चार टीमें लगी हैं…
सीसीटीवी खंगाले जा रहे हैं…
लेकिन कैरव गांधी कहां हैं? और कब तक सिर्फ “जांच जारी है” ही सुनने को मिलेगा?
👉 पूरा शहर जवाब चाहता है… और सबसे पहले — कैरव गांधी की सुरक्षित वापसी।
