जमशेदपुर : जमशेदपुर के जेम्को स्थित महानंद बस्ती में 05 दिसंबर 2025 को स्वर्गीय शंभू मेहता के असमय निधन ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य के चले जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। स्व. शंभू मेहता अपने पीछे दो मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं—एक 8 वर्षीय बेटी और एक 14 वर्षीय पुत्र। बच्चों की माता पहले ही उन्हें छोड़कर जा चुकी हैं, ऐसे में इन नन्हे जीवनों की पूरी जिम्मेदारी अब परिवार की बुजुर्ग दादी और बुआ के कंधों पर आ गई है।

आर्थिक तंगी और भावनात्मक पीड़ा के बीच यह परिवार हर दिन संघर्ष कर रहा है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता ने हालात को और भी कठिन बना दिया है। ऐसे समय में जब परिवार पूरी तरह टूट चुका था, तब समाजसेवी रवि जयसवाल मानवता की मिसाल बनकर उनके लिए सहारा बने।
समाजसेवी रवि जयसवाल ने पीड़ित परिवार की स्थिति को समझते हुए आगे बढ़कर उन्हें आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई। यह सहयोग केवल राशन देने तक सीमित नहीं था, बल्कि दुख से टूट चुके इस परिवार को यह अहसास दिलाने का प्रयास था कि वे इस मुश्किल घड़ी में अकेले नहीं हैं। रवि जयसवाल ने बच्चों और परिवार के सदस्यों से मिलकर उनका ढाढ़स बंधाया और हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रवि जयसवाल का यह कदम समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है। संकट की घड़ी में यदि समाज और समाजसेवी एकजुट होकर आगे आएं, तो किसी भी पीड़ा को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उनके इस मानवीय प्रयास से न केवल परिवार को तत्काल राहत मिली है, बल्कि बच्चों के चेहरे पर उम्मीद की एक नई किरण भी दिखाई दी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। स्वर्गीय शंभू मेहता के परिवार को भले ही अपूरणीय क्षति हुई हो, लेकिन समाज के सहयोग से उनके जीवन की राह को कुछ आसान बनाया जा सकता है। ऐसे संवेदनशील प्रयास समाज में करुणा, सहयोग और मानवता की भावना को और अधिक मजबूत करते हैं।
