ईचागढ़ | दीनबंधु पांडा : आदिवासी समाज के महान नेता, स्वतंत्रता सेनानी एवं संविधान निर्माता मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की जयंती के अवसर पर ईचागढ़ प्रखंड के बासाहातू गांव में उनकी प्रतिमा का भव्य अनावरण किया गया। प्रतिमा का अनावरण झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री एवं मद्यनिषेध विभाग के पूर्व मंत्री राजा पीटर के कर-कमलों से संपन्न हुआ।



इस अवसर पर पारंपरिक ग्रामप्रधान काशीनाथ सिंह मुंडा, पूर्व शिक्षक रवींद्र सिंह मुंडा, समाजसेवी मुकेश सिंह मुंडा, रामगोपाल सिंह मुंडा, रतनलाल सिंह मुंडा, लनीन सिंह मुंडा, संकोसरी देवी, सावित्री देवी, नरेश साहू, विस्थापित नेता राकेश रंजन महतो सहित लगभग 300 ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी संस्कृति, परंपरा एवं संवैधानिक अधिकारों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन ने कहा कि मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा ने संविधान सभा में आदिवासी समाज की सशक्त आवाज़ बनकर उनके अधिकारों के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया। उनकी दूरदृष्टि के कारण ही पाँचवीं अनुसूची के तहत आदिवासी क्षेत्रों को संवैधानिक संरक्षण मिला। उन्होंने जल, जंगल और जमीन को केवल संसाधन नहीं, बल्कि आदिवासी जीवन का आधार मानते हुए संविधान से जोड़ा।
वक्ताओं ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा केवल आदिवासी समाज के नेता ही नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय चिंतक भी थे। इसके बावजूद उन्हें आज तक वह राष्ट्रीय सम्मान नहीं मिला, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। संविधान सभा में आदिवासी अधिकारों की बुलंद आवाज़ उठाने वाले जयपाल सिंह मुंडा का योगदान आज भी देश के सामने पूरी तरह से नहीं आ पाया है।
कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में माँग की कि मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि ऐसा करना न केवल आदिवासी समाज के प्रति सम्मान होगा, बल्कि संविधान के मूल मूल्यों को सशक्त करने की दिशा में भी एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगा।



