जामताड़ा : उत्क्रमित मध्य विद्यालय धेनुकडीह में सोमवार को विद्यालय के प्रधानाध्यापक शांतिमय माजी के सेवानिवृत्त होने के अवसर पर विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर भावनाओं से सराबोर हो उठा। लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवा देने वाले शांतिमय माजी को सम्मानित करते हुए शिक्षकों, विद्यार्थियों और उपस्थित जनों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी।



कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई। बच्चों ने नृत्य एवं संगीत के माध्यम से अपने प्रिय प्रधानाध्यापक के प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त किया। इस दौरान कई विद्यार्थियों और शिक्षकों की आंखें नम हो गईं। वातावरण में एक ओर खुशी थी तो दूसरी ओर बिछड़ने का दर्द भी साफ झलक रहा था।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) जमाल ए रजा उपस्थित रहे। उनके साथ प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी मिलन घोष तथा शिक्षाविद माधव चंद्र महतो भी मंचासीन रहे। इसके अलावा शिक्षक दिलीप मंडल, स्वपन मंडल, दीपक मंडल, सुखेन मान्ना, घनश्याम गोराई, प्रदीप माजी, संजय वाद्यकर, सुब्रत चौधरी, देवीश्वर सोरेन, सेवानिवृत्त शिक्षक अजीत घोष, स्वपन पातर, निर्मल घोष, सुब्रत चक्रवर्ती सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य, बीआरसी कर्मी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने प्रधानाध्यापक शांतिमय माजी के सेवाकाल पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उनके योगदान को सराहा। बताया गया कि उन्होंने दिनांक 17 फरवरी 2004 को शिक्षक पद पर अपनी सेवा की शुरुआत की थी और इसके बाद विभिन्न विद्यालयों में अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए अंततः उत्क्रमित मध्य विद्यालय धेनुकडीह से 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए। उनका पूरा सेवाकाल अनुशासन, समर्पण और निष्ठा का प्रतीक रहा।
प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी मिलन घोष ने कहा कि सेवानिवृत्ति सरकारी सेवा का एक अनिवार्य हिस्सा है। सरकार द्वारा निर्धारित समय के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी को सेवानिवृत्त किया जाता है, लेकिन एक शिक्षक का योगदान कभी समाप्त नहीं होता। उनके द्वारा दिए गए ज्ञान और संस्कार हमेशा समाज में जीवित रहते हैं।
शिक्षाविद माधव चंद्र महतो ने ‘गुरु’ शब्द की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक को समाज का सृजनकर्ता और राष्ट्र निर्माता कहा जाता है। उन्होंने शांतिमय माजी के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनका सेवाकाल पूरी तरह बेदाग और प्रेरणादायक रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण बनेगा।
वहीं शिक्षक सुखेन मान्ना ने अपने संबोधन में कहा कि समय के साथ शिक्षा प्रणाली में काफी बदलाव आया है। आज के दौर में शिक्षकों को भी आधुनिक तकनीकों से अपडेट रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग है, इसलिए बच्चों को भी उसी दिशा में शिक्षित करना समय की मांग है।
कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकों, अतिथियों एवं विद्यार्थियों ने शांतिमय माजी के स्वस्थ, सुखद एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्हें अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह सौहार्दपूर्ण और भावनात्मक वातावरण में संपन्न हुआ, जहां हर किसी ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें विदाई दी।
रिपोर्ट: अमित कुमार नाग
