जमशेदपुर : सड़क किनारे खुलेआम मांस काटना, लटकाकर बेचना और स्वच्छता की खुलेआम धज्जियां उड़ाना—यह सब शहर में धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक ठोस कार्रवाई न के बराबर है।

















































खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत मांस और मुर्गा दुकानों का पंजीकरण अनिवार्य है, बावजूद इसके जिले में बड़ी संख्या में दुकानें बिना रजिस्ट्रेशन और नियमों के उल्लंघन के साथ संचालित हो रही हैं।
नियम बहुत, निगरानी शून्य….
खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार— मांस काटने का चाकू और अन्य धारदार हथियार स्टेनलेस स्टील के होने चाहिए, मांस दुकान की ऊंचाई कम से कम 3 मीटर होनी चाहिए, वातानुकूलित दुकान होने पर ऊंचाई 2.5 मीटर से कम नहीं, दुकान का दरवाजा स्वत बंद होने वाला और काले शीशे से ढका होना चाहिए, धार्मिक स्थलों से कम से कम 50 मीटर की दूरी अनिवार्य।
लेकिन हकीकत यह है कि चौक-चौराहों और सड़कों के किनारे खुले में मांस काटा और बेचा जा रहा है।
जांच व्यवस्था कागजों तक सीमित…..
जिले में लगभग 100 रजिस्टर्ड मांस दुकानें हैं, लेकिन जांच के लिए जिले में कोई ठोस व्यवस्था नहीं, खाद्य पदार्थों की जांच के लिए सैंपल रांची भेजे जाते हैं, यानी जब तक रिपोर्ट आती है, तब तक मांस बिक चुका होता है और उपभोक्ता खा चुका होता है।
अधिकारी बोले – अभियान चलेगा…..
जिला खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी संजय कुमार का कहना है—
“सड़क किनारे खुले में मांस बेचने वालों के खिलाफ जल्द अभियान चलाया जाएगा। जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की कमी पाई गई, तो संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
लेकिन सवाल यही है—
👉 अभियान कब?
👉 कार्रवाई कब?
स्वास्थ्य से खिलवाड़ कब तक?…..
खुले में मांस बेचने से, संक्रमण का खतरा, गंदगी और मक्खियों का जमाव, गंभीर बीमारियों की आशंका फिर भी निगरानी ढीली और सिस्टम सुस्त नजर आ रहा है।
कानून है, नियम हैं… पर अमल कब होगा?…..
शहरवासियों की सेहत से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर अब सवाल उठना लाजिमी है— क्या कार्रवाई सिर्फ फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगी?





