रांची : झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 में लागू नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने बीआइटी मेसरा को विशेषज्ञ समिति गठित कर नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले की जांच करने और यह बताने को कहा है कि परीक्षा में लागू किया गया फॉर्मूला सही है या नहीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद बीआइटी मेसरा को मामले में प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया गया। बीआइटी मेसरा के अधिवक्ता ने अदालत का नोटिस प्राप्त कर लिया है।

अदालत ने माना कि नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले को लेकर उठे विवाद के समाधान के लिए विशेषज्ञ राय आवश्यक है। इसी के मद्देनजर बीआइटी मेसरा को विशेषज्ञ समिति गठित कर फॉर्मूले का तकनीकी परीक्षण करने और विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 29 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। उल्लेखनीय है कि प्रार्थी गिरिझर प्रसाद राउत व अन्य की ओर से इस मामले में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
बताया गया है कि 26,001 सहायक आचार्यों की नियुक्ति के लिए जेएसएससी की ओर से नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया लागू की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने इसी नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले की वैधता और प्रक्रिया को चुनौती दी है। अब बीआइटी मेसरा की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर मामले की आगे की सुनवाई में चर्चा होगी।
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