सरायकेला-खरसावां : जिले के चांडिल स्थित नारायण आईटीआई, लुपुंगडीह में भारत के महान उद्योगपति, दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माता एवं आधुनिक औद्योगिक भारत के शिल्पकार जमशेद जी टाटा की जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान परिसर में उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर पांडे ने की। अपने संबोधन में उन्होंने जमशेद जी टाटा के जीवन, संघर्ष, दूरदृष्टि और ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे दौर में उद्योगों की नींव रखी जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और आर्थिक रूप से कमजोर माना जाता था। वर्ष 1868 में Tata Group की स्थापना कर उन्होंने भारतीय उद्योग जगत में स्वदेशी सोच और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी।
उन्होंने कहा कि जमशेदजी टाटा का सपना था कि भारत अपना इस्पात स्वयं बनाए और औद्योगिक रूप से सशक्त बने। इसी स्वप्न के परिणामस्वरूप आगे चलकर Tata Steel की स्थापना हुई, जिसने भारत को वैश्विक औद्योगिक मानचित्र पर स्थापित किया। साथ ही वर्ष 1903 में मुंबई में Taj Mahal Palace Hotel की स्थापना कर उन्होंने भारतीय स्वाभिमान को नई पहचान दी और विश्वस्तरीय आतिथ्य सेवा की शुरुआत की।
डॉ. पांडे ने कहा कि जमशेद जी टाटा का मानना था कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति का आधार उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान है। इसी सोच के तहत Indian Institute of Science की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ, जो आज देश का प्रमुख अनुसंधान संस्थान है।
उन्होंने बताया कि जमशेदजी टाटा केवल उद्योगपति ही नहीं बल्कि समाजसेवा और श्रमिक कल्याण के भी बड़े समर्थक थे। उन्होंने श्रमिकों के लिए बेहतर वेतन, आवास, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षित कार्य-परिस्थितियों की परंपरा शुरू की, जो उस समय बेहद प्रगतिशील सोच थी। उनका जीवन त्याग, परिश्रम, ईमानदारी और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रशिक्षुओं एवं शिक्षकगणों ने उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने तथा तकनीकी दक्षता के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संकल्प लिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से एडवोकेट निखिल कुमार, प्राचार्य जयदीप पांडे, शांति राम महतो, भगत लाल तेली, पवन महतो, अजय मंडल, गौरव महतो, कृष्णा पद महतो, निमाई मंडल, सिसुमति दास समेत अन्य लोग उपस्थित रहे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
