जमशेदपुर, संवाददाता : राजधानी दिल्ली में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद अब औद्योगिक शहर जमशेदपुर की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के अधिकांश होटल, गेस्ट हाउस, बार, रेस्टोरेंट और प्रमुख बाजारों में फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं होने से बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है। जानकारी के अनुसार शहर के करीब 90 प्रतिशत होटल, बार, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्निशमन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई जगहों पर फायर अलार्म सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, हाइड्रेंट सिस्टम और अग्निशमन यंत्र या तो मौजूद नहीं हैं या वर्षों से खराब पड़े हुए हैं।



संजय मार्केट का फायर हाइड्रेंट सिस्टम वर्षों से बंद
साकची स्थित संजय मार्केट शहर के सबसे व्यस्त बाजारों में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है। इसके बावजूद यहां स्थापित फिक्स्ड फायर हाइड्रेंट सिस्टम वर्षों से खराब पड़ा है। हाल ही में अग्निशमन विभाग की जांच के दौरान यह गंभीर तथ्य सामने आया। दुकानदारों ने भी स्वीकार किया कि सुरक्षा के लिए लगाया गया सिस्टम लंबे समय से काम नहीं कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार आग लगने की स्थिति में फायर हाइड्रेंट सिस्टम शुरुआती नियंत्रण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होता है। इसके निष्क्रिय होने से आग तेजी से फैल सकती है और भारी जन-धन की हानि हो सकती है।
संकरी गलियां बढ़ा रही हैं जोखिम
संजय मार्केट सहित शहर के कई पुराने बाजारों में संकरी गलियां और अव्यवस्थित निर्माण सबसे बड़ी समस्या बन चुके हैं। कई स्थानों पर अतिक्रमण के कारण दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भीड़भाड़ वाले बाजारों में आग कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर सकती है। यदि दमकल वाहन समय पर घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाए तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
बिष्टुपुर, कदमा और बारीडीह में भी खतरा
फायर सेफ्टी की समस्या केवल साकची तक सीमित नहीं है। शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र बिष्टुपुर, कदमा और बारीडीह में भी कई इमारतों में आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपकरणों की कमी है. कई प्रतिष्ठानों में फायर अलार्म सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और अग्निशमन यंत्रों का रखरखाव नहीं किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर तो सुरक्षा उपकरण लगाए ही नहीं गए हैं।
बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे कई होटल और बार
सूत्रों के अनुसार शहर में कई होटल, गेस्ट हाउस और बार ऐसे हैं जो अग्निशमन विभाग की वैध एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के बिना संचालित हो रहे हैं। नियमों के अनुसार होटल, बहुमंजिला इमारत और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को संचालन से पूर्व अग्निशमन विभाग से एनओसी प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके लिए भवन में पर्याप्त पानी की व्यवस्था, सुरक्षित सीढ़ियां, चौड़ा पहुंच मार्ग, फायर एक्सटिंग्विशर, हाइड्रेंट सिस्टम और इमरजेंसी एग्जिट होना जरूरी है।
संसाधनों की कमी से जूझ रहा अग्निशमन विभाग
शहर की सुरक्षा का दायित्व संभालने वाला गोलमुरी अग्निशमन विभाग स्वयं संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। विभाग के पास कुल चार दमकल वाहन हैं, जिनमें एक नई और तीन पुरानी गाड़ियां शामिल हैं। वहीं पूरे विभाग में मात्र नौ कर्मचारी तैनात हैं, जिनमें चार चालक, चार फायरमैन और एक पदाधिकारी शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी बड़े अग्निकांड की स्थिति में यह संसाधन अपर्याप्त साबित हो सकते हैं।
प्रशासन के लिए चेतावनी
दिल्ली की हालिया त्रासदी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भयावह साबित हो सकती है. जमशेदपुर में यदि समय रहते होटलों, बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की व्यापक जांच नहीं की गई तथा फायर सेफ्टी नियमों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है. शहरवासियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन, नगर निकाय, अग्निशमन विभाग और भवन संचालकों को मिलकर तत्काल प्रभावी कदम उठाने होंगे। क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही हजारों लोगों की जान जोखिम में डाल सकती है।



