रांची : झारखंड के करोड़ों लोगों के लिए एक ऐतिहासिक और सुखद खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कैबिनेट ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए ‘रिम्स-2’ (RIMS-2) के निर्माण के लिए ₹4189 करोड़ से अधिक की राशि की स्वीकृति दे दी है। इस फैसले के साथ ही झारखंड अब चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है।

अब इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने की मजबूरी खत्म
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जो पहल की है, उसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब झारखंड के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली, वेल्लोर या मुंबई जैसे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। रिम्स-2 के निर्माण से राज्य के भीतर ही वर्ल्ड-क्लास चिकित्सा सुविधाएं और सुपर-स्पेशियलिटी इलाज उपलब्ध हो सकेगा।
क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं?
- विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर: अत्याधुनिक भवन और आधुनिक चिकित्सा मशीनों से लैस अस्पताल।
- सुपर-स्पेशियलिटी टीम: अनुभवी डॉक्टरों और विशेषज्ञों की तैनाती।
- बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं: आम से लेकर गंभीर बीमारियों का इलाज अब एक ही छत के नीचे संभव होगा।
राज्य को होंगे ये 3 बड़े फायदे
- गंभीर बीमारियों का इलाज अब अपने राज्य में: राज्य की जनता को अब इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ेंगी।
- रोजगार के नए अवसर: इस परियोजना के धरातल पर उतरने से हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे।
- मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा: बेहतर सुविधाओं के कारण झारखंड न केवल अपने नागरिकों को, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए भी एक स्वास्थ्य केंद्र (Medical Hub) के रूप में उभरेगा।
यह ऐतिहासिक निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के “स्वस्थ झारखंड, समृद्ध झारखंड” के संकल्प को और मजबूती प्रदान करता है। रिम्स-2 न केवल एक अस्पताल होगा, बल्कि यह राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक नई उम्मीद की किरण बनकर सामने आएगा।

