नीमडीह थाना में ठीकेदारी विवाद का हुआ समझौता, अगले ही दिन कंपनी गेट पर धरने पर बैठे ग्रामीण, जमीन अधिग्रहण में अनियमितता और मुआवजे को लेकर गंभीर आरोप
सरायकेला-खरसावां : नीमडीह प्रखंड के आदरडीह, गौरडीह, रघुनाथपुर, सांगिड़ा, नीमडीह, केतूंगा समेत आसपास के कई मौजा में प्रस्तावित एसएम स्टील एंड पावर लिमिटेड परियोजना को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दो दिन पहले कंपनी में ठीकेदारी को लेकर दो पक्षों के बीच उत्पन्न विवाद का रविवार को नीमडीह थाना में आपसी समझौते के साथ पटाक्षेप हो गया, लेकिन इसके अगले ही दिन सोमवार को जमीन अधिग्रहण के विरोध में ग्रामीणों का एक पक्ष कंपनी गेट पर धरने पर बैठ गया. काफी देर तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद कंपनी प्रबंधन, जमीन अधिग्रहण से जुड़े प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच वार्ता हुई, जिसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि धरना भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन जमीन अधिग्रहण को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अभी भी बरकरार है और यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो स्थिति कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।

छह महीने पहले ग्रामसभा में ही दिख गया था विरोध का तेवर……
करीब छह महीने पहले गौरडीह पंचायत भवन में आयोजित ग्रामसभा में ही ग्रामीणों ने प्रस्तावित परियोजना के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया था। ग्रामसभा शुरू होते ही ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि “हम अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।” इसके बाद पूरा पंचायत भवन विरोध के नारों से गूंज उठा. नीमडीह, गौरडीह, रघुनाथपुर, सांगिड़ा, केतूंगा और सुंडीदीह मौजा के ग्रामीणों ने एक स्वर में घोषणा की थी कि वे एसएम स्टील एंड पावर लिमिटेड की स्थापना का विरोध करेंगे और किसी भी परिस्थिति में अपनी जमीन नहीं सौंपेंगे।
जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया पर गंभीर आरोप…….
ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका दावा है कि अधिकांश जमीन मालिकों ने अपनी सहमति नहीं दी, इसके बावजूद कागजों में सहमति दर्शाकर खरीद-बिक्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि दलालों ने लगभग 44 हजार रुपये प्रति डिसमिल मूल्य वाली जमीन को महज 11 हजार रुपये प्रति डिसमिल दिखाकर करोड़ों रुपये की अनियमितता की है। कई किसानों को अब तक उचित मुआवजा भी नहीं मिला है।
‘जमीन नहीं, हमारी पहचान है’……..
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी पहचान, आजीविका और अस्मिता का आधार है। उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी एक कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और भविष्य की रक्षा के लिए है. सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण को लेकर लंबे समय से असंतोष का माहौल बना हुआ है। यदि प्रशासन, कंपनी प्रबंधन और प्रभावित ग्रामीणों के बीच जल्द सार्थक समाधान नहीं निकला तो यह विवाद आने वाले दिनों में बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

