नई दिल्ली : वर्ष 2005 के चर्चित तालाबीरा-दो कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी राहत देते हुए क्लीन चिट प्रदान कर दी है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करते हुए उन्हें आरोपी के रूप में तलब करने वाले आदेश को भी निरस्त कर दिया। इसके साथ ही लंबे समय से चल रहे इस हाई-प्रोफाइल मामले का औपचारिक रूप से पटाक्षेप हो गया।

सुप्रीम कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की पीठ ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कहा कि अधीनस्थ अदालत के पास क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार कर संज्ञान लेने का कोई पर्याप्त आधार नहीं था। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाने का औचित्य नहीं बनता. गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 27 दिसंबर 2024 को निधन हो चुका है। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद उन्हें इस मामले में औपचारिक रूप से क्लीन चिट मिल गई है।
जाने क्या था मामला…….
यह मामला वर्ष 2005 में ओडिशा स्थित तालाबीरा-दो कोयला ब्लॉक के हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ को आवंटन से जुड़ा है। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह के पास प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी था। कथित कोयला आवंटन अनियमितताओं के मामले में विशेष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारेख समेत अन्य लोगों को आरोपी के रूप में तलब किया था। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी। अब सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए शीर्ष अदालत ने इस मामले में सभी आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी है।
