जमशेदपुर : एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में छत का हिस्सा गिरने से तीन मरीजों की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के आदेश के अनुपालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जन विकास मंच के अध्यक्ष सौरभ विष्णु ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को पत्र भेजकर आयोग के निर्देशों का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने और मामले की वर्तमान स्थिति की जानकारी देने की मांग की है।

घटना 3 मई 2025 की है। एमजीएम अस्पताल के मेडिसिन विभाग के समीप छत का एक हिस्सा गिरने से मरीज डेविड जॉनसन, लुकास साइमन तिर्की और श्रीमती ताती की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए थे। घटना के बाद सौरभ विष्णु ने साकची थाना में लिखित शिकायत देकर अस्पताल के तत्कालीन अधीक्षक और भवन के समीप नींव की खुदाई का काम कर रही हैदराबाद की ठेका कंपनी KMV Project के प्रबंध निदेशक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। शिकायत में उन्होंने आशंका जताई थी कि निर्माण कार्य के दौरान की गई खुदाई से भवन की संरचना कमजोर हुई हो सकती है।
विष्णु ने इसके बाद 12 मई 2025 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई थी। आयोग में यह मामला केस संख्या 682/34/6/2025 के तहत पंजीकृत हुआ। उनके अनुसार, आयोग ने 10 जुलाई 2026 को पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन को शिकायत के संबंध में जवाब और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसके लिए निर्धारित समयसीमा करीब 7 अगस्त 2026 को समाप्त हो चुकी है, लेकिन अब तक उन्हें अथवा पीड़ित परिवारों को मामले की प्रगति या अनुपालन के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।
चार बिंदुओं पर मांगी जानकारी……
उपायुक्त को भेजे पत्र में विष्णु ने चार बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी मांगी है। इनमें मामले की वर्तमान जांच स्थिति, आयोग के निर्देश के अनुसार जांच में उन्हें औपचारिक रूप से शामिल किए जाने की स्थिति, अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने पर उसकी प्रति तथा रिपोर्ट नहीं सौंपे जाने की स्थिति में संशोधित समयसीमा की जानकारी शामिल है। इसके अलावा उन्होंने मूल शिकायत में नामित अस्पताल प्रशासन और ठेका कंपनी के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा है।
विष्णु ने कहा कि आयोग ने जिला प्रशासन को स्पष्ट और समयबद्ध निर्देश दिया था, लेकिन निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बावजूद मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को यह जानने का अधिकार है कि मामले की जांच कहां तक पहुंची है। साथ ही, आम लोगों को भी यह जानने का अधिकार है कि सरकारी अस्पताल में मरीजों को ऐसी संरचना के नीचे इलाज की स्थिति में क्यों रखा गया, जिसका एक हिस्सा बाद में ढह गया. उन्होंने जिला प्रशासन से NHRC के निर्देशों पर तत्काल कार्रवाई करते हुए अनुपालन की स्थिति सार्वजनिक करने और पीड़ित परिवारों को जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।
