जमशेदपुर : ESIC अधिकारियों के विरुद्ध पूर्व में की गई शिकायतों की सतर्कता जांच की प्रक्रिया को लेकर शिकायतकर्ताओं ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गुरुवार को दोपहर 12:30 बजे ESIC अस्पताल, आदित्यपुर में सतर्कता टीम के समक्ष शिकायतकर्ताओं एवं संबंधित पक्षों की उपस्थिति में सत्यापन प्रक्रिया हुई। हालांकि, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान उनकी मूल शिकायत और तथ्यों को गंभीरता से सुनने के बजाय एक ही सवाल को अलग-अलग तरीके से पूछकर उन्हें उलझाने तथा मुख्य मुद्दे से भटकाने का प्रयास किया गया. सत्यापन प्रक्रिया के दौरान वी एंटरप्राइजेज के अलख राय, ऑटो प्रोफाइल लिमिटेड के सागर रंजन, होटल कर्नेल के सरबजीत सिंह, कर्मचारी कस्तूरी कांगसा बनिक, एम. ओम प्रकाश राव, जीडी एंड कंपनी के गोवर्धन गुप्ता, ब्रजवंदना फाउंडेशन की ओर से बीरेंद्र कुमार सहित अन्य संबंधित लोग मौजूद रहे।

जब बात सुननी ही नहीं थी तो बुलाया क्यों ?……
शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनकी बात को निष्पक्ष रूप से सुनना ही नहीं था, तो उन्हें सत्यापन के लिए बुलाने का औचित्य क्या था? उनका कहना है कि यदि पूरी प्रक्रिया महज कागजी खानापूर्ति और औपचारिकता तक सीमित थी, तो इतने सारे शिकायतकर्ताओं एवं संबंधित पक्षों को ESIC अस्पताल में बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि उनकी शिकायत के मूल बिंदुओं के बजाय संबंधित ESIC अधिकारियों सचित कुमार एवं रवि शंकर के पक्ष को अधिक महत्व दिया जा रहा है। इससे सतर्कता जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर संदेह उत्पन्न हुआ है।
निष्पक्ष जांच की मांग……
ब्रजवंदना फाउंडेशन एवं एंटी करप्शन फोरम ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी निर्दोष अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करवाना नहीं है। संगठन की मांग केवल इतनी है कि शिकायतों की निष्पक्ष, स्वतंत्र, पारदर्शी और तथ्य आधारित जांच हो. संगठन का कहना है कि यदि लगाए गए आरोप निराधार हैं, तो निष्पक्ष जांच में यह भी स्पष्ट हो जाना चाहिए। वहीं, यदि शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सतर्कता जांच औपचारिकता नहीं, सच सामने लाने का माध्यम…….
ब्रजवंदना फाउंडेशन एवं एंटी करप्शन फोरम ने कहा कि सतर्कता जांच का उद्देश्य केवल प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि तथ्यों की तह तक पहुंचकर वास्तविकता सामने लाना होना चाहिए। शिकायतकर्ताओं के व्यक्तिगत अनुभवों और उनके द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को नजरअंदाज कर केवल अधिकारियों के पक्ष को महत्व देना किसी भी निष्पक्ष जांच की भावना के अनुरूप नहीं है।
संगठन ने दो टूक कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शिकायतकर्ता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। भ्रष्टाचार, अनियमितता, उत्पीड़न अथवा प्रशासनिक समस्याओं से संबंधित किसी भी शिकायत पर निष्पक्ष तरीके से सुनवाई और स्वतंत्र जांच जरूरी है. ब्रजवंदना फाउंडेशन एवं एंटी करप्शन फोरम ने आज की सत्यापन प्रक्रिया में शिकायतकर्ताओं की बात को अपेक्षित महत्व नहीं दिए जाने की कड़ी निंदा करते हुए संबंधित उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े सवालों को आगे भी मजबूती के साथ उठाया जाता रहेगा।
