प्रशासन का स्पष्टीकरण—प्रतिमा हटाने या विस्थापित करने का अब तक कोई प्रयास नहीं
उज्जैन : सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन के पुराने शहर में चल रहे सड़क चौड़ीकरण के काम ने एक बार फिर धार्मिक आस्था और विकास के बीच संतुलन का सवाल खड़ा कर दिया है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग तक सड़क चौड़ीकरण के दौरान करीब 170 वर्ष पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन और चाहरदीवारी सड़क की जद में आने के बाद हटाई गई। इसके बाद मंदिर में विराजमान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर मामला चर्चा में आ गया. स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने के लिए लगातार तीन दिनों तक प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। इसे श्रद्धालु और स्थानीय लोग भगवान हनुमान का चमत्कार मान रहे हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने पूरे मामले पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का अभी तक कोई प्रयास नहीं किया गया है।

मंदिर परिसर में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़……
मंदिर की चाहरदीवारी और भवन का हिस्सा हटाए जाने के बाद खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को फिलहाल टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। प्रतिमा को लेकर चर्चा बढ़ने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही भी बढ़ गई है। सुबह से लेकर देर रात तक लोग दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं. बुधवार को संत समाज के कई प्रमुख संत भी मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की। संतों ने प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने का विरोध करते हुए प्रशासन से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े संत नृत्यगोपाल दास के शिष्य महंत राघवेंद्र दास महाराज ने कहा कि भगवान की प्रतिमा को बार-बार उठाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि लगातार प्रयासों के बाद भी प्रतिमा नहीं हट रही है और लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं, तो इसे एक संकेत के रूप में देखते हुए प्रतिमा को यथास्थान रहने देना चाहिए. महानिर्मोही अखाड़े के गादीपति महंत विनीत गिरी महाराज ने भी प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील की। संतों ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास की नींव लोगों की आस्था और भावनाओं को ठेस पहुंचाकर नहीं रखी जानी चाहिए। उन्होंने बातचीत और आपसी सहमति के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर दिया. मंदिर परिसर में बटुकों की मंडली ने हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी किया।
कांग्रेस ने किया प्रदर्शन, भगवा ध्वज लेकर पहुंचे कार्यकर्ता…..
प्रतिमा हटाए जाने की कथित योजना के विरोध में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया। विधायक महेश परमार, पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर और शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भगवा ध्वज लेकर खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे. कार्यकर्ताओं ने मंदिर में रामधुन गाई और हनुमान जी की पूजा-अर्चना की। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर कथित तौर पर जल्दबाजी करने का आरोप लगाते हुए प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग की।
करीब 170 साल पुराना है मंदिर…..
खड़े हनुमान मंदिर को उज्जैन के पुराने धार्मिक स्थलों में महत्वपूर्ण आस्था केंद्र माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां लंबे समय से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के कारण भी इस मंदिर से लोगों का गहरा भावनात्मक जुड़ाव है. चाहरदीवारी हटाए जाने के बाद फिलहाल प्रतिमा को टेंट के नीचे सुरक्षित रखा गया है। सड़क से गुजरने वाले लोग भी रुककर दर्शन कर रहे हैं। मंदिर परिसर में लगातार श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है।
प्रतिमा की प्राचीनता की भी हो रही जांच……
मामले में अब एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि पुरातत्व विभाग प्रतिमा की प्राचीनता को लेकर जांच कर रहा है। प्रारंभिक स्तर पर प्रतिमा के करीब 1000 वर्ष पुरानी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि प्रतिमा की वास्तविक उम्र और ऐतिहासिक महत्व को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा. यदि जांच में प्रतिमा वास्तव में इतनी प्राचीन पाई जाती है, तो इसका महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व भी सामने आएगा।
सिंहस्थ की तैयारियों के बीच प्रशासन के सामने चुनौती….
उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर बड़े स्तर पर विकास कार्य चल रहे हैं। शहर के पुराने हिस्सों में सड़क चौड़ीकरण, यातायात व्यवस्था को बेहतर करने और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का काम इसी तैयारी का हिस्सा है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक का मार्ग भी इसी योजना में शामिल है. ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर सिंहस्थ से पहले सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर करना, तो दूसरी ओर खड़े हनुमान जी की प्रतिमा से जुड़ी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना. प्रशासन की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट किया गया है कि प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। साथ ही, सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ही आगे कोई निर्णय लिए जाने की बात कही गई है।
अब नजर अंतिम फैसले पर…
फिलहाल खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर मामला आस्था, इतिहास और विकास तीनों के केंद्र में आ गया है। संत समाज संवाद के जरिए समाधान चाहता है, राजनीतिक दल भी सक्रिय हो चुके हैं और श्रद्धालु प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग कर रहे हैं. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण की जरूरत और खड़े हनुमान जी की प्रतिमा से जुड़ी आस्था के बीच प्रशासन किस तरह का रास्ता निकालता है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली प्रशासनिक और पुरातात्विक जांच पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।