रोहित शर्मा की एक रिपोर्ट : जमशेदपुर : महज 40 से 45 मिनट की तेज बारिश ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) और उससे जुड़े विभागों की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। बारिश थमते-थमते शहर के कई प्रमुख इलाकों की सड़कें देखते ही देखते जलमग्न हो गईं। कहीं सड़क पर पानी का सैलाब नजर आया तो कहीं बड़े-बड़े बोल्डर और तेज आंधी-पानी में गिरे पेड़ लोगों की राह में आफत बनकर खड़े हो गए. हालात ऐसे हो गए कि सड़कें सड़क कम और नदी ज्यादा नजर आने लगीं। लोगों और वाहन चालकों को पानी के बीच से निकलने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। कई स्थानों पर यातायात की रफ्तार इतनी धीमी हो गई कि लोग घंटों रेंगते हुए आगे बढ़ने को मजबूर नजर आए। बारिश ने शहर की उस व्यवस्था को आईना दिखा दिया, जिसकी चमक अक्सर कागजों और बैठकों तक ही दिखाई देती है।

व्यवस्था की खुली पोल…….
बारिश के दौरान कई प्रमुख सड़कों पर पानी इस कदर जमा हुआ कि राहगीरों और वाहन चालकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि सड़क कहां है और पानी कहां से शुरू हो रहा है. जलनिकासी की व्यवस्था कई जगह बेबस नजर आई। नालियां और ड्रेनेज सिस्टम पानी के दबाव के सामने जवाब देते दिखे. सड़कों पर जमा पानी के बीच वाहनों की रफ्तार थम गई। दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा परेशान दिखे। कई लोग अपने वाहनों को संभालते हुए पानी के बीच रास्ता तलाशते नजर आए। स्थिति ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
बोल्डर और पेड़ बने मुसीबत, जद्दोजहद करते दिखे लोग….
तेज आंधी और बारिश ने मुश्किलें और बढ़ा दीं। कई जगह सड़क पर बड़े-बड़े बोल्डर और गिरे हुए पेड़ यातायात में बाधा बन गए। रास्ता साफ करने और आगे बढ़ने के लिए लोगों को खुद ही जद्दोजहद करनी पड़ी. बारिश के बीच सड़क पर फंसे लोग कभी पानी से बचने की कोशिश करते दिखे तो कभी गिरे पेड़ों और मलबे के बीच से रास्ता निकालते नजर आए। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब महज 40-45 मिनट की बारिश में शहर की यह तस्वीर सामने आ गई, तो अगर इससे ज्यादा देर तक मूसलाधार बारिश हो गई तो जमशेदपुर का क्या हाल होगा?
कागज पर ‘हीरो’, धरातल पर ‘दूध का दूध, पानी का पानी’………
शहर में हर साल बारिश से पहले नालों की सफाई, जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने, जलजमाव वाले इलाकों को चिह्नित करने और आपदा से निपटने की तैयारियों के दावे किए जाते हैं। बैठकों में योजनाएं बनती हैं, निर्देश जारी होते हैं और व्यवस्था को चाक-चौबंद बताया जाता है।
लेकिन पहली तेज बारिश ने ही दावों और धरातल के बीच का फासला सामने ला दिया।
कागज पर तमाम विभाग खुद को ‘हीरो’ साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते, लेकिन जब बारिश की कुछ बूंदें आसमान से उतरती हैं तो धरातल पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है।
सवाल बड़ा है….अगली बारिश के लिए क्या तैयारी है?…..
यह सिर्फ जलजमाव का मामला नहीं है। यह शहर की जलनिकासी, सड़क व्यवस्था, पेड़ों की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और संबंधित विभागों की तैयारियों पर सीधा सवाल है. जब 40 से 45 मिनट की बारिश शहर की रफ्तार रोक सकती है, सड़क को नदी में तब्दील कर सकती है और पेड़-बोल्डर लोगों के लिए परेशानी बन सकते हैं, तो फिर लगातार कई घंटे होने वाली बारिश की स्थिति की कल्पना ही डराने वाली है।
ऐसे में सवाल सिर्फ इतना है. अगर अगली बारिश इससे ज्यादा हुई तो क्या होगा?….
शायद इसका जवाब संबंधित विभागों के पास हो, लेकिन शहर की सड़कों पर दिखाई देने वाली तस्वीर देखकर तो यही लगता है कि फिलहाल इस सवाल का जवाब भगवान ही मालिक है।