कोलकाता : उत्तर कोलकाता के सारदा पार्क मैदान में दुर्गा पूजा के लिए बनाए गए अनूठे पंडाल में भगदड़ की घटना के पीछे उसकी जटिल बनावट और संकरे प्रवेश-निकास मार्ग को प्रमुख कारण माना जा रहा है। करीब 20 हजार वर्ग फीट में फैला यह पंडाल उत्तर कोलकाता के सबसे पुराने और प्रसिद्ध पूजा पंडालों में से एक है। अपनी अलग-अलग थीम के कारण यह पिछले कुछ वर्षों से चर्चा में रहा है।

इस बार पंडाल की थीम ‘बियॉन्ड साउंड’ रखी गई थी। इसके अनुरूप अंदर लगभग अंधेरे जैसा माहौल बनाया गया था। मां दुर्गा की प्रतिमा के ऊपर बने छोटे-छोटे छेदों से रोशनी अंदर पहुंचती थी। हालांकि, इस बार पंडाल की बनावट पहले से अलग थी। प्रवेश करने के बाद श्रद्धालुओं को ऊंचे गोलाकार कॉरिडोर से 360 डिग्री घूमकर बाहर निकलना पड़ता था। प्रवेश और निकास के लिए केवल एक-एक रास्ता बनाया गया था, जो दोनों ओर से संकरी गलियों में खुलता था।
बारिश के बाद बढ़ा भीड़ का दबाव……
जानकारी के अनुसार, सप्तमी की शाम बारिश शुरू होते ही प्रवेश द्वार से पंडाल के अंदर जाने के लिए लोगों की भीड़ तेजी से बढ़ने लगी। संकरे रास्तों और सीमित निकास व्यवस्था के कारण भीड़ का दबाव बढ़ता चला गया। इसी दौरान पंडाल के निकास द्वार का एक हिस्सा गिर गया। इसके बाद सुरक्षाकर्मी सीटी बजाकर लोगों को बाहर निकलने की चेतावनी देने लगे और अनाउंसमेंट शुरू कर दिया। इसी बीच अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। भीड़ के दबाव के कारण कई लोग बाहर निकलने के रास्ते में फंसते चले गए।
निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका पर सवाल……
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घटना के बाद निजी सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही की बात कही। उनके अनुसार, सुरक्षाकर्मियों द्वारा अनाउंसमेंट किए जाने के बाद ही लोगों ने भागना शुरू कर दिया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि मामले में निजी सुरक्षाकर्मियों को हिरासत में लिया गया है. घटना ने बड़े पूजा पंडालों में भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन निकास व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
