रांची : देश के विभिन्न हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण ठिकानों को बम से उड़ाने की धमकियों के बीच रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट के भीतर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने के बावजूद बाहरी चहारदीवारी के पास अवैध पार्किंग का मामला चिंता का विषय बना हुआ है। संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास वाहनों के खड़े रहने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हाल के दिनों में देश के कई महत्वपूर्ण स्थानों को धमकियां मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। ऐसे में रांची एयरपोर्ट की सुरक्षा के साथ-साथ बाहरी परिसर में निगरानी और प्रतिबंधित क्षेत्रों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी हो गया है।
चहारदीवारी के पास खड़े वाहन सुरक्षा के लिए चुनौती
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है। एयरपोर्ट की बाहरी चहारदीवारी, स्टेट हैंगर और मौसम केंद्र जैसे संवेदनशील स्थानों के आसपास वाहनों की पार्किंग को सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट अथॉरिटी ने अवैध रूप से पार्क किए गए 95 वाहनों का विवरण और उनके रजिस्ट्रेशन नंबर जिला प्रशासन को सौंपे थे। इसके बाद हिनू से एयरपोर्ट तक के मार्ग को नो-पार्किंग जोन घोषित किया गया। इसके बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्र में वाहनों के खड़े होने की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इस स्थिति में नो-पार्किंग नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना और नियमित निगरानी बढ़ाना प्रशासन के लिए अहम चुनौती बन गया है।
पहले भी मिल चुकी हैं बम और विमान उड़ाने की धमकियां
रांची एयरपोर्ट के लिए सुरक्षा अलर्ट कोई नई बात नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2024 के बीच एयरपोर्ट को बम होने या विमान उड़ाने से संबंधित कई फर्जी अथवा संदिग्ध धमकियां मिल चुकी हैं। मई से अक्टूबर 2024 के बीच भी ऐसी घटनाओं के कारण सुरक्षा एजेंसियों को सतर्कता बढ़ानी पड़ी थी। इसी सुरक्षा संवेदनशीलता को देखते हुए दिसंबर 2023 में एयरपोर्ट को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया था। लगातार मिल रही धमकियों के मद्देनजर सुरक्षा जांच, निगरानी और आपातकालीन तैयारियों का महत्व और बढ़ गया है।
आपात स्थिति से निपटने के लिए बनेगा आइसोलेशन-वे
आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से आइसोलेशन-वे के निर्माण की योजना पर भी काम किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, यदि किसी विमान में बम होने की सूचना मिलती है या कोई अन्य आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो विमान को मुख्य रनवे से हटाकर निर्धारित सुरक्षित और अलग स्थान पर खड़ा किया जा सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य आपात स्थिति में विमानों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ आवश्यक कार्रवाई के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराना है।
एयरपोर्ट के भीतर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, प्रशासन से सहयोग की अपेक्षा
एयरपोर्ट निदेशक विनोद कुमार के अनुसार, टर्मिनल और विमानन क्षेत्र के भीतर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यात्रियों की जांच की जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए उनसे सहयोग की अपेक्षा है। बाहरी क्षेत्र में अवैध पार्किंग पर नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन को पत्र भी भेजा जा चुका है।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है समन्वय
लगातार मिल रही धमकियों के बीच एयरपोर्ट की सुरक्षा केवल परिसर के भीतर तक सीमित नहीं रह सकती। बाहरी चहारदीवारी के आसपास अनधिकृत पार्किंग पर रोक, नियमित गश्त और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां नो-पार्किंग नियमों को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाती हैं। एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए स्पष्ट निर्देशों के साथ-साथ उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।


