जमशेदपुर : सौरभ विष्णु, अध्यक्ष जन विकास मंच एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी, ने मानगो फ्लाईओवर के नीचे राज्य सरकार की ₹24.62 करोड़ की राशि से बिछाई जा रही जलापूर्ति पाइपलाइन में मानगो के हिस्से पर सवाल उठाया है। उनके द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में पथ निर्माण विभाग, पथ प्रमण्डल, जमशेदपुर ने 27 अक्टूबर 2026 के पत्र में लिखित रूप से बताया है कि इस पाइपलाइन के स्वीकृत प्राक्कलन में फायर हाइड्रेंट लगाने का प्रावधान नहीं है, और अग्निशमन विभाग से अनापत्ति, परामर्श अथवा सिफारिश से संबंधित कोई सूचना उसके कार्यालय अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है।
इसी विभाग ने 12 अक्टूबर के उत्तर में बताया था कि मानगो चौक से ब्लू बेल्स स्कूल तक की इस पाइपलाइन की लागत ₹24.62 करोड़ राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत है, और कार्य टाटा स्टील के स्पेसिफिकेशन के अनुरूप एवं उसके पर्यवेक्षण में कराया जा रहा है। पाइपलाइन से किसे लाभ मिलेगा, इस प्रश्न को विभाग ने “टाटा स्टील से संबंधित” बताया था। वहीं हाइड्रेंट के इन्हीं प्रश्नों पर मानगो नगर निगम ने 15 अक्टूबर के उत्तर में लिखा कि यह विषय “मानगो नगर निगम से संबंधित नहीं है”, जबकि झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 70 में जलापूर्ति एवं अग्निशमन सेवाएं नगरपालिका के मूल कार्यों में शामिल हैं।
उन्होंने ने बताया कि जुलाई 2025 में उपायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में मानगो के निवासियों ने इस पाइपलाइन पर फायर हाइड्रेंट एवं स्थानीय आपूर्ति हेतु टी-वाल्व की मांग की थी, और उसके बाद प्रशासन की ओर से स्थल निरीक्षण भी हुआ था। पथ निर्माण विभाग ने लिखित रूप से बताया है कि वह ज्ञापन और निरीक्षण से संबंधित पत्राचार उसके अभिलेख में नहीं है। 10 सितंबर को उपायुक्त कार्यालय से इस ज्ञापन पर लिए गए निर्णय की जानकारी मांगी गई थी, किंतु आवेदन पथ निर्माण विभाग को भेज दिया गया, और पथ निर्माण विभाग ने कई प्रश्न वापस उपायुक्त कार्यालय को लौटा दिए। सात सप्ताह बाद भी उपायुक्त कार्यालय से कोई सूचना नहीं मिलने पर उन्होंने उपायुक्त कार्यालय के प्रथम अपीलीय पदाधिकारी के समक्ष प्रथम अपील दायर की है।
उन्होंने ने कहा कि, “यह पाइपलाइन जनता के पैसे से, जनता की सड़क के नीचे, मानगो के घरों के सामने से गुजर रही है। तो यह तय होना चाहिए कि इसमें मानगो का हिस्सा क्या है। पथ निर्माण विभाग कहता है प्रावधान नहीं, नगर निगम कहता है हमारा विषय नहीं — तो मानगो की आग बुझाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? हम किसी के विरोध में नहीं हैं — सरकार और कंपनी मिलकर तय करें कि आग लगने पर मानगो को इससे पानी मिलेगा या नहीं, और रोज़ की जरूरत के लिए एक बूंद भी मिलेगी या नहीं। जब परियोजनाओं के प्राक्कलन संशोधित हो सकते हैं, तो जन-सुरक्षा का प्रावधान भी जोड़ा जा सकता है।”
जन विकास मंच की मांगें…….
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अग्निशमन विभाग के परामर्श से इस पाइपलाइन पर उपयुक्त दूरी पर फायर हाइड्रेंट का प्रावधान जोड़ा जाए।
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मानगो की स्थानीय आपूर्ति हेतु कनेक्शन बिंदु (टी-वाल्व) दिए जाएं, और पाइपलाइन व हाइड्रेंटों के स्वामित्व एवं रखरखाव की जिम्मेदारी लिखित रूप से सार्वजनिक हो।
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जुलाई 2025 के ज्ञापन एवं स्थल निरीक्षण पर लिए गए निर्णय की प्रति सार्वजनिक की जाए।



