जमशेदपुर : शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के नाम पर हो रही पुलिस की चेकिंग अब विवादों में घिरती जा रही है। गोलमुरी गोलचक्कर का ताज़ा मामला इस व्यवस्था की पोल खोल रहा है, यहां साफ देखा जा सकता है कि ट्रैफिक चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मी कैसे छिप कर खड़े हैं. आपको बताते चले कि छुपकर खड़े रहते हैं और जैसे ही कोई वाहन पास आता है, अचानक रुकवाकर कार्रवाई शुरू कर देते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तरीका न सिर्फ़ अव्यवहारिक है बल्कि बेहद ख़तरनाक भी। अचानक रुकवाए गए वाहन अक्सर संतुलन खो बैठते हैं — जिससे कई बार गिरने और घायल होने की घटनाएं हो चुकी हैं। नागरिकों का कहना है कि सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था बनाने के बजाय पुलिस की यह “छुपन-छुपाई चेकिंग” खुद दुर्घटनाओं का कारण बन रही है।
लोगों ने आरोप लगाया है कि ट्रैफिक चेकिंग के दौरान पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव है। कई बार बिना किसी स्पष्ट कारण के गाड़ियों को रोका जाता है और जुर्माने के नाम पर बहस, पैरवी या मनमानी वसूली जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं। चालकों का कहना है कि जब चेकिंग का कोई बोर्ड या संकेत दूर से नज़र नहीं आता, तो अचानक की गई कार्रवाई उन्हें असमंजस में डाल देती है — कई चालक डर या घबराहट में तेज़ ब्रेक लगा देते हैं, जिससे खुद की और दूसरों की जान पर बन आती है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से सख्त सवाल पूछे हैं — क्या इस तरह की गुप्त चेकिंग जनता की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल रही? क्या पहले से कोई चेतावनी या संकेत नहीं होना चाहिए ताकि लोग सतर्क रह सकें? और अगर किसी हादसे या चोट की घटना होती है तो उसकी जवाबदेही कौन लेगा?
नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि ट्रैफिक नियमों का पालन ज़रूरी है, लेकिन उसे लागू करने के लिए पारदर्शिता और संवेदनशीलता भी उतनी ही अहम है। सड़क पर ‘सुरक्षा’ के नाम पर ‘डर’ का माहौल बनाना पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उसकी नाकामी को दर्शाता है।
लोगों ने मांग की है कि ट्रैफिक चेकिंग हमेशा खुले और स्पष्ट स्थानों पर की जाए, जहां चेतावनी बोर्ड और बैरिकेड्स दूर से दिखें। हर कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए ताकि किसी पक्ष पर अनुचित व्यवहार का आरोप न लगे। साथ ही, अगर किसी व्यक्ति को चोट लगती है या किसी तरह की क्षति होती है, तो पुलिस को तत्काल सहायता और पारदर्शी जांच प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए।
जमशेदपुर की जनता का कहना है — “ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन यह जनता की सुरक्षा और सम्मान की कीमत पर नहीं होना चाहिए। पुलिस को कानून लागू करना है, डर नहीं फैलाना।”
