जमशेदपुर : 1 दिसंबर, विश्व एड्स दिवस के अवसर पर सामने आए ताज़ा आंकड़ों ने पूरे जमशेदपुर को चिंता में डाल दिया है. झारखंड में जहां हजारीबाग एड्स–पीड़ित लोगों की संख्या में पहले स्थान पर है, वहीं जमशेदपुर बहुत कम अंतर से दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि शहर के कई पैथोलॉजी सेंटर अपने यहां पाए गए मामलों को छिपाते हैं, जिससे वास्तविक स्थिति और भी भयावह मानी जा रही है।



सूत्र बताते हैं कि जमशेदपुर के 16 से 20 वर्ष की उम्र के युवाओं में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ा है। कई छोटे–बड़े पैथोलॉजी सेंटरों में बिना डॉक्टर की अनुमति के युवा–युवतियों का एचआईवी टेस्ट हो रहा है। रिपोर्ट में मरीजों के नाम तक फर्जी दर्ज किए जाते हैं ताकि पहचान छिपी रहे। कई लोग रिपोर्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद डर या शर्म के कारण इलाज के लिए नहीं पहुंचते और अनजाने में संक्रमण फैलाने का कारण बन जाते हैं।
होटल–प्लेटो संस्कृति बना सबसे बड़ा कारण — किशोरावस्था के जोड़ो का ‘बिना जांच’ संपर्क…..
जमशेदपुर में ऐसे होटलों की संख्या तेजी से बढ़ी है जहां केवल छात्र–छात्राओं या युवाओं को कमरा दिया जाता है। इन होटलों में आने वाली जोड़ों की उम्र 18 से 25 वर्ष तक बताई जाती है। पुलिस छापेमारी के दौरान कई बार नाबालिग जोड़ो को भी पकड़ा गया है, लेकिन ज्यादातर मामलों में उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है।
यह भी बड़ा तथ्य सामने आया है कि….
अधिकांश होटल बिना पहचान सत्यापन के सिर्फ नकद लेकर कमरा दे देते हैं।
कई तथाकथित ‘फ्लैट–रिसॉर्ट’ भी छुपकर देह व्यापार का अड्डा चलाते हैं।
कुछ होटल मालिक जानबूझकर कम उम्र के जोड़ो को कमरा उपलब्ध कराते हैं, क्योंकि इससे उन्हें ज्यादा कमाई होती है।
कई बार शिकायत होने पर भी पैसों के प्रभाव और लेन–देन के कारण कार्रवाई नहीं हो पाती।
पूर्व एसपी की छापेमारी के बाद कुछ समय के लिए इस धंधे पर लगाम लगी थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद फिर से वही हालात बन गए। युवाओं में जागरूकता कम होने और निजी संबंधों के दौरान सावधानी न बरतने से एड्स फैलाव की रफ्तार बढ़ती जा रही है।
सरकारी आंकड़े बता रहे खतरनाक तस्वीर…..
झारखंड में 2022–23 में 1,890 नए एचआईवी संक्रमित मिले।
इनमें से जमशेदपुर के 2,400 से अधिक मरीज इलाज में शामिल हैं।
1,357 पुरुष
861 महिलाएं
142 बच्चे
साथ ही, ट्रांसजेंडर समुदाय भी गंभीर रूप से प्रभावित है—राज्य के 61 मामलों में से 49 अकेले जमशेदपुर के हैं।
मेडिकल कॉलेज और ब्लड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार…..
2023 में 41 संक्रमित मरीज ब्लड बैंक में मिले।
2024 की शुरुआत में भी कई रक्त दाताओं में एचआईवी मिला, जो कि बेहद खतरनाक संकेत है क्योंकि इससे रक्त संक्रमण के माध्यम से बीमारी के फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
मरीज डर के कारण इलाज नहीं कराते — संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा….
पुलिस और मेडिकल सूत्रों के अनुसार होटल–प्लेटो संस्कृति में शामिल कई युवक–युवतियां पॉजिटिव पाए जाने पर:
अपनी पहचान उजागर होने के डर से गायब हो जाते हैं।
इलाज शुरू नहीं करते।
और अनजाने में एड्स को और फैलाने का कारण बनते हैं।
कुछ संक्रमित युवक–युवतियां अपने व्यवहार में बदलाव लाकर भी संबंध बनाना जारी रखते हैं, जो समाज के लिए और ज्यादा खतरनाक स्थिति पैदा करता है।
जवाबदेही कौन लेगा?…..
पैथोलॉजी, होटल संचालक, प्रशासन और पुलिस—सभी की जिम्मेदारी तय करनी होगी। अगर अभी भी सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में जमशेदपुर एड्स मामलों में झारखंड में नंबर वन बन जाएगा।
निष्कर्ष : अब भी समय है — जागरूकता, सख्ती और इलाज ही बचाएगा शहर को….
- होटलों पर सख्त नियम लागू।
- सभी पैथोलॉजी पर सरकारी निगरानी।
- स्कूल–कॉलेजों में जागरूकता अभियान।
- रिपोर्ट छुपाने पर कानूनी कार्रवाई।
- एचआईवी पॉजिटिव मरीजों के इलाज की गोपनीय और आसान व्यवस्था।
- जमशेदपुर का युवा वर्ग तेजी से संवेदनशील स्थिति में पहुँच रहा है।
- यदि अभी जागरूकता और अनुशासन नहीं आया, तो यह संकट और गहरा सकता है।
