चांडिल। सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के चांडिल अनुमंडल स्थित चांडिल डैम में इन दिनों पर्यटकों की बढ़ती भीड़ के बीच नौका विहार की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। पिकनिक और जल पर्यटन के लिए पहुंचे सैलानियों के बीच यह चिंता गहराती जा रही है कि सुरक्षा मानकों का पालन हर स्थिति में क्यों नहीं किया जा रहा।




प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चांडिल डैम में कई बार यात्रियों को बिना लाइफ जैकेट के ही नाव में बैठाकर नौका विहार कराया गया। जब मौके पर मौजूद लोगों ने इस संबंध में पूछताछ की, तो यह कहकर जवाब दिया गया कि नाव में बैठे कुछ यात्री “चांडिल डैम के स्टाफ” हैं और वे किसी को घर छोड़ने जा रहे हैं, इसलिए उन्हें लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई। इस तर्क ने सुरक्षा को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है।
स्थानीय लोगों और पर्यटकों का कहना है कि जीवन का मूल्य सभी के लिए समान होता है और सुरक्षा नियम किसी व्यक्ति या पद के आधार पर अलग नहीं हो सकते। चाहे वह पर्यटक हो या स्टाफ, जलाशय में नाव पर सवार हर व्यक्ति के लिए लाइफ जैकेट जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य मानी जाती है। नियमों में इस तरह का कोई अपवाद होना लोगों को समझ से परे लग रहा है।
बताया जा रहा है कि चांडिल डैम में नौका विहार संचालन को लेकर हाल ही में नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत चांडिल सुवर्णरेखा बांध विस्थापित मत्स्यजीवी सहकारी समिति को संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति की ओर से यह कहा गया है कि सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखा जाएगा, लेकिन मौके पर दिखाई दे रही लापरवाही इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
पर्यटकों का यह भी कहना है कि यदि स्टाफ या परिचितों के लिए सुरक्षा नियमों में ढील दी जाती है, तो आम पर्यटकों में भी यह संदेश जाता है कि लाइफ जैकेट महज औपचारिकता है। इससे भविष्य में जोखिम और बढ़ सकता है। जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में नियमों का एकसमान और सख्त पालन ही दुर्घटनाओं को रोक सकता है।
स्थानीय सामाजिक लोगों ने प्रशासन और पर्यटन विभाग से मांग की है कि चांडिल डैम में नौका विहार के दौरान लाइफ जैकेट पहनना सभी के लिए अनिवार्य रूप से लागू किया जाए, चाहे वह कोई भी हो। साथ ही, मौके पर सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी और स्पष्ट जवाबदेही तय करने की जरूरत बताई जा रही है।
कुल मिलाकर, चांडिल डैम में बढ़ते पर्यटन के साथ यह आवश्यक हो गया है कि सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। बिना लाइफ जैकेट नौका विहार और नियमों में कथित छूट जैसी बातें यदि समय रहते नहीं रोकी गईं, तो किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
