सरायकेला-खरसावां (चांडिल) : नारायण आईटीआई लुपुंगडीह, चांडिल परिसर में भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री, महान स्वतंत्रता सेनानी एवं सादगी के प्रतीक लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्य तिथि श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान के शिक्षकगण, कर्मचारी एवं प्रशिक्षणार्थियों ने शास्त्री जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

















































कार्यक्रम के दौरान संस्थान के संस्थापक सह भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य जटाशंकर पांडे ने शास्त्री जी के जीवन एवं व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री जी का संपूर्ण जीवन ईमानदारी, त्याग और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है, जिससे आज की युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
वक्ताओं ने बताया कि शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में एक साधारण परिवार में हुआ था। पिता के असमय निधन के बावजूद उन्होंने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त की और काशी विद्यापीठ से शिक्षा ग्रहण कर “शास्त्री” की उपाधि प्राप्त की। वे महात्मा गांधी के विचारों से अत्यंत प्रभावित थे और सत्य, अहिंसा व सादगी को अपने जीवन में आत्मसात किया।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने कई बार जेल यात्रा की और आज़ादी के बाद विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए देश की सेवा की। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय परिवहन मंत्री, रेल मंत्री एवं गृह मंत्री रहे। रेल मंत्री रहते हुए एक दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उनका इस्तीफा देना उनके उच्च नैतिक मूल्यों का प्रतीक है।
9 जून 1964 को लाल बहादुर शास्त्री जी भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री बने। उनके कार्यकाल में 1965 का भारत-पाक युद्ध हुआ, जिसमें उन्होंने देश का साहसिक एवं दृढ़ नेतृत्व किया। इसी दौरान दिया गया उनका अमर नारा “जय जवान, जय किसान” आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में उनका आकस्मिक निधन हो गया।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने शास्त्री जी के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से एडवोकेट निखिल कुमार, शांति राम महतो, प्रकाश महतो, देवाशीष मंडल, शुभम साहू, पवन महतो, शशि प्रकाश महतो, संजीत महतो, कृष्णा पद महतो, शेखर मंडल, निमाई मंडल, सिसुमति दास सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।





