जमशेदपुर : झारखंड में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ जहां तकनीकी विकास हो रहा है, वहीं मोबाइल आधारित साइबर अपराधों में भी चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। यूपीआई भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, आधार आधारित सेवाएं और ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म अब आम लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं, खासकर रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों में। लेकिन इस डिजिटल बदलाव ने लोगों को नए और जटिल साइबर खतरों के प्रति अधिक संवेदनशील भी बना दिया है।

राज्य में साइबर अपराध का दायरा लगातार बढ़ रहा है। जामताड़ा पहले से ही देशभर में साइबर फ्रॉड के लिए बदनाम रहा है, और अब मोबाइल ऐप आधारित धोखाधड़ी के मामलों में तेजी देखी जा रही है। हालिया रुझानों के अनुसार, 70 प्रतिशत से अधिक साइबर फ्रॉड की शुरुआत मोबाइल डिवाइस से होती है। व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए मैलिशियस APK फाइल्स फैल रही हैं, जबकि फर्जी लोन ऐप्स और सरकारी योजनाओं के नकली ऐप्स भी तेजी से बढ़ रहे हैं। यूपीआई फ्रॉड और OTP इंटरसेप्शन जैसे हमले आम होते जा रहे हैं।
साइबर ठग अब पारंपरिक कॉल फ्रॉड से आगे बढ़कर मोबाइल ऐप के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे अक्सर बिजली बिल, नौकरी के ऑफर या कूरियर नोटिफिकेशन के नाम पर मालवेयर भेजते हैं। कई बार ये फाइलें परिचित नंबरों से आने के कारण लोग बिना संदेह के इन्हें इंस्टॉल कर लेते हैं। इंस्टॉल होने के बाद ये ऐप्स संवेदनशील डेटा जैसे OTP, कॉन्टैक्ट्स और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच बना लेते हैं, जिससे तुरंत आर्थिक नुकसान हो सकता है।
इन खतरों में सबसे गंभीर है रिमोट एक्सेस ट्रोजन (RAT), जो हमलावर को पीड़ित के फोन पर लगभग पूरा नियंत्रण दे देता है। इसके जरिए अपराधी OTP चुरा सकते हैं, बैंकिंग ट्रांजैक्शन कर सकते हैं, कॉल और मैसेज की निगरानी कर सकते हैं, यहां तक कि कैमरा और माइक्रोफोन भी चालू कर सकते हैं।
इसी बढ़ती समस्या को ध्यान में रखते हुए भारतीय साइबर सुरक्षा कंपनी ट्रेसएक्स लैब्स ने ‘ट्रेसएक्स गार्ड’ नामक एआई आधारित मोबाइल सुरक्षा ऐप लॉन्च किया है। यह ऐप मैलिशियस ऐप्स, फिशिंग लिंक, नकली यूपीआई स्कैम और अन्य डिजिटल खतरों से बचाने के लिए तैयार किया गया है।
ट्रेसएक्स गार्ड की खासियत यह है कि यह पारंपरिक एंटीवायरस से आगे जाकर एआई और रीयल-टाइम थ्रेट एनालिसिस का उपयोग करता है। यह ऐप इंस्टॉल से पहले ही खतरनाक APK फाइल्स को पहचान सकता है, संदिग्ध ऐप्स और उनकी परमिशन का विश्लेषण करता है, फिशिंग लिंक और नकली QR कोड को ब्लॉक करता है, और असुरक्षित वाई-फाई नेटवर्क के बारे में चेतावनी देता है। साथ ही यह OTP चोरी, सिम से छेड़छाड़ और डेटा लीक जैसी गतिविधियों पर भी नजर रखता है। अधिकतर लोग लापरवाही की वजह से नहीं, बल्कि जानकारी की कमी के कारण साइबर ठगी का शिकार होते हैं। ऐसे में ट्रेसएक्स गार्ड जैसे समाधान उपयोगकर्ताओं को समय रहते सतर्क कर सकते हैं और संभावित नुकसान को रोक सकते हैं।
झारखंड में बढ़ते साइबर अपराध और पहले से मौजूद नेटवर्क को देखते हुए मजबूत मोबाइल सुरक्षा अब बेहद जरूरी हो गई है। ऐसे में ट्रेसएक्स गार्ड का लॉन्च डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो राज्य के लोगों को सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर ले जाने में मदद कर सकता है।
