जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले का जादूगोड़ा क्षेत्र अब तेजी से साइबर अपराध के बड़े केंद्र के रूप में उभरता नजर आ रहा है। कभी यूरेनियम खनन और यूसील परियोजनाओं के लिए पहचान रखने वाला यह इलाका अब ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी टास्क स्कैम के मामलों को लेकर सुर्खियों में है। लगातार हो रही पुलिस कार्रवाई और केंद्रीय एजेंसियों की छापेमारी के बावजूद साइबर ठगी का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा।



जानकारी के अनुसार जादूगोड़ा के कोकदा, इचड़ा, कुलडिहा, बुर्काडीह, राखामाइंस और तिलामुड़ा समेत कई गांवों से साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित किए जाने की बातें सामने आ रही हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यहां सक्रिय गिरोह सुनियोजित तरीके से लोगों को ऑनलाइन जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहे हैं।
टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए फंसाए जा रहे लोग
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को गूगल रिव्यू, गेमिंग टास्क और ऑनलाइन जॉब का झांसा देकर अपने जाल में फंसाते थे। शुरुआत में कुछ राशि देकर लोगों का भरोसा जीता जाता था, जिसके बाद उनसे लाखों रुपये विभिन्न बैंक खातों, यूपीआई आईडी और डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर करवाए जाते थे।
सूत्रों के अनुसार गिरोह के सदस्य कमीशन के आधार पर रकम ट्रांसफर करवाने का काम करते थे, जबकि ठगी की बड़ी राशि मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थी। बताया जा रहा है कि साइबर अपराध से अर्जित पैसों से आरोपी महंगे मोबाइल फोन, बाइक और आलीशान जीवनशैली का आनंद ले रहे हैं।
दिल्ली पुलिस और CID की कई बार हो चुकी है कार्रवाई
पिछले दो वर्षों में जादूगोड़ा, चाकुलिया, घाटशिला और कोवाली क्षेत्र से कई साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। दिल्ली पुलिस, झारखंड CID और स्थानीय पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से कई बार छापेमारी कर गिरोहों का पर्दाफाश किया गया है।
मार्च 2026 में झारखंड CID ने घाटशिला में छापेमारी कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिसने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर एक रिटायर्ड डॉक्टर से 38 लाख रुपये की ठगी की थी। वहीं दिल्ली पुलिस ने इचड़ा निवासी एक युवक को गिरफ्तार किया था, जिस पर 7 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी का आरोप है।
यूसील कर्मी और रिटायर्ड कर्मचारी भी बन रहे शिकार
सबसे चिंता की बात यह है कि यूसील के कई कर्मचारी और रिटायर्ड कर्मी भी साइबर गिरोह के निशाने पर हैं। लगातार सामने आ रहे करोड़ों रुपये की ठगी के मामलों ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो जादूगोड़ा को “झारखंड का दूसरा जामताड़ा” कहा जाने लगेगा। प्रशासन अब साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए व्यापक अभियान चलाने की तैयारी में जुटा हुआ है।



