रांची : राजधानी रांची के ओरमांझी थाना में ट्रक छोड़ने के बदले 25 हजार रुपये की कथित अवैध वसूली के आरोप ने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राकेश रंजन ने सिल्ली के डीएसपी मनीष चंद्र लाल को जांच का जिम्मा सौंपा है। प्रारंभिक जांच में थाना के मुंशी अजीत प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. मंगलवार को डीएसपी ने ओरमांझी थाना पहुंचकर मामले की जांच शुरू की। इस दौरान थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर तथा अन्य संबंधित अभिलेखों की जांच की गई। साथ ही मामले से जुड़े पुलिसकर्मियों एवं अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ भी की गई। जांच रिपोर्ट एसएसपी को सौंपे जाने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ट्रक चालक ने लगाए गंभीर आरोप…..
ट्रक चालक सतीश तिवारी ने आरोप लगाया है कि उनका ट्रक छोड़ने के लिए थाना में 25 हजार रुपये की मांग की गई। उन्होंने ऑनलाइन भुगतान करने की इच्छा जताई, लेकिन कथित तौर पर उनसे नकद राशि देने का दबाव बनाया गया। चालक का दावा है कि नकद रुपये देने के बाद ही ट्रक छोड़ा गया. चालक ने यह भी आरोप लगाया कि उससे एक कागज पर यह लिखवाया गया कि अब उसे डायल-112 की सहायता की आवश्यकता नहीं है। इस मामले में उसने थाना के मुंशी अजीत, चालक रंजीत तथा तत्कालीन थाना प्रभारी मनोज कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
थाना प्रभारी ने आरोपों से किया इनकार…..
वहीं, ओरमांझी थाना प्रभारी मनोज कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनके अनुसार, रविवार शाम एक फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट ने ट्रक को रोका था। रिकवरी एजेंट से बचने के लिए चालक ने डायल-112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस दोनों पक्षों को थाना लेकर आई. थाना में जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ट्रक का वास्तविक पंजीकरण नंबर DL-1LAM-5145 है, जबकि वाहन पर DL-1LAM-5146 अंकित किया गया था। पुलिस का कहना है कि चालक ने पूछताछ में स्वीकार किया कि रिकवरी एजेंट से बचने के लिए नंबर प्लेट में बदलाव किया गया था।
निलंबन के बाद उठे सवाल…..
हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि थाना की कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार थी, तो फिर मुंशी को निलंबित क्यों किया गया। फिलहाल डीएसपी स्तर पर जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

