जमशेदपुर : जन विकास मंच के प्रमुख एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु ने राज्य सरकार द्वारा संपत्ति की खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पर स्टांप शुल्क के अतिरिक्त प्रस्तावित म्यूनिसिपल सेस लगाए जाने का विरोध किया है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर प्रस्तावित व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार पहले नगर निगमों की कार्यप्रणाली और नागरिक सुविधाओं में सुधार सुनिश्चित करे, उसके बाद किसी नए कर या सेस पर विचार करे।

सौरभ विष्णु ने कहा कि नगर निकायों की आय बढ़ाने के नाम पर म्यूनिसिपल सेस लगाने की तैयारी की जा रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो जमीन, मकान और फ्लैट की खरीद आम लोगों के लिए और अधिक महंगी हो जाएगी। इसका सबसे अधिक असर मध्यम वर्गीय परिवारों तथा जीवनभर की जमा-पूंजी से अपना घर खरीदने वाले लोगों पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मानगो नगर निगम का गठन हुए करीब दो माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जनता को अपेक्षित विकास कार्य दिखाई नहीं दिए हैं। शहर की कई सड़कें जर्जर हैं, नालियों की नियमित सफाई नहीं हो रही है, जलनिकासी की समस्या बनी हुई है और कई स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा है। ऐसे में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।
सौरभ विष्णु ने कहा कि नगर निगमों का गठन नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया है, न कि बिना विकास कार्य किए नए-नए कर लगाने के लिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जनहित के विरुद्ध कोई निर्णय लिया जाता है तो जन विकास मंच लोकतांत्रिक तरीके से जनता के साथ मिलकर उसका विरोध करेगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब नगर निगम बनने के बाद भी लोगों को सड़क, सफाई, पेयजल और जलनिकासी जैसी मूलभूत सुविधाएं संतोषजनक रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, तो सरकार किस आधार पर नया सेस लगाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई से पहले ही परेशान जनता पर अतिरिक्त कर का बोझ डालना उचित नहीं होगा।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में सौरभ विष्णु ने मांग की है कि प्रस्तावित म्यूनिसिपल सेस को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही नगर निगमों को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार अपने बजट से पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराए तथा सड़क, नाली, सफाई, पेयजल और जलनिकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दे। उन्होंने कहा कि “पहले विकास, फिर टैक्स” की नीति ही जनहित और राज्य के संतुलित विकास के लिए सबसे उपयुक्त होगी।

