व्यापारियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कर सलाहकारों को जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील से जुड़े कानूनी पहलुओं से कराया गया अवगत
जमशेदपुर : सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की टैक्स एवं फाइनेंस उपसमिति की ओर से मंगलवार को बिष्टुपुर स्थित चैम्बर भवन में “Filing of Appeals before GSTAT” विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, अधिवक्ताओं, कर सलाहकारों, उद्योगपतियों और व्यवसायियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) में अपील दायर करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्राप्त की. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय जीएसटी, जमशेदपुर के आयुक्त आनंद कुमार (IRS) मुख्य अतिथि तथा अपर आयुक्त रणविजय कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिंहभूम चैम्बर के अध्यक्ष मानव केडिया ने की।

स्वागत भाषण में मानव केडिया ने कहा कि जीएसटी कानून लगातार विकसित हो रहा है और GSTAT के संचालन शुरू होने के बाद करदाताओं एवं व्यवसायियों के लिए इसकी प्रक्रिया की सही जानकारी बेहद आवश्यक हो गई है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समय की जरूरत हैं. मुख्य अतिथि आनंद कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि करदाताओं और विभाग के बीच पारदर्शी एवं स्वस्थ कर व्यवस्था के लिए कानून की सही समझ और समयबद्ध अनुपालन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि GSTAT की स्थापना से करदाताओं को एक प्रभावी और सुलभ अपीलीय मंच मिला है, जिससे कर विवादों का शीघ्र और न्यायसंगत समाधान संभव होगा। उन्होंने व्यवसायियों से कानून के प्रावधानों का पालन करने और अपने अधिकारों व दायित्वों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
सेमिनार के मुख्य वक्ता सीए एवं अधिवक्ता अभिषेक अग्रवाल (FCA, LLB, DISA), कोलकाता ने सरल एवं व्यावहारिक शैली में GSTAT में अपील दायर करने की पूरी प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि अपील दायर करने से पहले सही बेंच का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ मामलों की सुनवाई केवल नई दिल्ली स्थित प्रिंसिपल बेंच में होती है, जबकि अन्य मामलों की सुनवाई राज्य बेंच में की जाती है। गलत बेंच में अपील दायर करने से समय-सीमा प्रभावित हो सकती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा जारी प्रत्येक नोटिस या पत्र के विरुद्ध GSTAT में अपील नहीं की जा सकती। केवल प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के आदेश, पुनरीक्षण आदेश अथवा प्रवेश स्तर पर अस्वीकृत अपील जैसे मामलों में ही अपील का अधिकार प्राप्त होता है। उन्होंने यह भी बताया कि अपील की समय-सीमा आदेश जारी होने की तिथि से नहीं, बल्कि आदेश के संप्रेषण (Communication) की तिथि से शुरू होती है।
सीए अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि प्रथम अपीलीय प्राधिकारी से अनुकूल आदेश मिलने के बाद भी करदाताओं को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि विभाग छह माह के भीतर GSTAT में अपील दायर कर सकता है। इसलिए ट्रिब्यूनल पोर्टल पर नियमित निगरानी आवश्यक है. उन्होंने Cross Objection को जीएसटी कानून का सबसे प्रभावी लेकिन कम उपयोग किया जाने वाला प्रावधान बताते हुए कहा कि यदि विभाग अपील करता है तो करदाता बिना किसी प्री-डिपॉजिट और अतिरिक्त शुल्क के निर्धारित अवधि में क्रॉस ऑब्जेक्शन दाखिल कर अपने पक्ष को मजबूती से रख सकता है. सेमिनार के दौरान उपस्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, अधिवक्ताओं और व्यवसायियों ने GSTAT से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने विस्तारपूर्वक समाधान प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन टैक्स एवं फाइनेंस उपसमिति के सचिव अधिवक्ता अंशुल रिंगसिया ने किया, जबकि अंत में मानद महासचिव पुनीत कौंटिया ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, मुख्य वक्ता, सभी प्रतिभागियों तथा कार्यक्रम के प्रायोजक JM Finance के प्रति आभार व्यक्त किया. इस अवसर पर चैम्बर के उपाध्यक्ष अनिल मोदी, हर्ष अग्रवाल, सचिव भारत मकानी, विनोद शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य प्रतीक अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कर सलाहकार, उद्योगपति एवं व्यवसायी उपस्थित रहे।

